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मेट्रो विस्तार और रेल सुविधाओं को लेकर रेल मंत्री से मिले जनप्रतिनिधि

बैरकपुर, खड़दह और नोआपाड़ा के जनप्रतिनिधियों ने मेट्रो, स्टेशन विकास और यात्री सुविधाओं को लेकर सौंपा विस्तृत प्रस्ताव।

By श्वेता सिंह

Jun 08, 2026 16:37 IST

अशीन विश्वास, बैरकपुर।

बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र में रेल और मेट्रो परियोजनाओं को गति देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। हाल ही में बरानगर से बैरकपुर तक कोलकाता मेट्रो की पिंक लाइन के विस्तार को लेकर नई हलचल शुरू हुई है। इसी बीच क्षेत्र के मंत्रियों और विधायकों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर रेल और यातायात व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें उनके सामने रखीं।

दरअसल, 2010 में स्वीकृत 12.5 किलोमीटर लंबी बरानगर-बैरकपुर मेट्रो परियोजना को लेकर हाल में रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) और कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। इसके बाद बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र के लोगों में परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।

नबान्न सभागार में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में आयोजित बैठक के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को लिखित रूप में कई प्रस्ताव सौंपे। इनमें मेट्रो विस्तार से लेकर स्टेशनों के आधुनिकीकरण, फ्लाईओवर निर्माण और माल ढुलाई से जुड़ी सुविधाओं तक कई मांगें शामिल हैं।

मेट्रो को बैरकपुर से आगे कल्याणी एम्स तक ले जाने की मांग

नोआपाड़ा के विधायक और मंत्री अर्जुन सिंह ने बरानगर से बैरकपुर तक मेट्रो सेवा जल्द शुरू करने की मांग उठाई। उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया कि भविष्य में इस मेट्रो लाइन को कल्याणी स्थित एम्स तक बढ़ाया जाए, ताकि उत्तर 24 परगना और नदिया जिले के लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिल सके।

अर्जुन सिंह ने कांचरापाड़ा में प्रस्तावित रेल कोच फैक्टरी की योजना को भी लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र के औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

इसके अलावा उन्होंने श्यामनगर के 23 नंबर रेलगेट पर लगातार लगने वाले जाम और लोगों की परेशानी को देखते हुए वहां फ्लाईओवर बनाने की मांग की। साथ ही कांकीनाड़ा रेल क्षेत्र में कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकोर) का एक फ्रेट टर्मिनल स्थापित करने का सुझाव भी दिया।

उनका कहना है कि कोलकाता के उत्तरी हिस्से में फिलहाल कोई फ्रेट टर्मिनल नहीं है। माल ढुलाई की अधिकांश सुविधाएं शालिमार और माझेरहाट तक सीमित हैं, इसलिए उत्तर क्षेत्र में ऐसी सुविधा की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

बैरकपुर स्टेशन के विकास पर भी जोर

बैरकपुर के विधायक कौस्तभ बागची ने रेल मंत्री को पत्र देकर बरानगर-बैरकपुर मेट्रो परियोजना को जल्द शुरू करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि बीटी रोड के नीचे मौजूद टाला-पलता जल पाइपलाइन के कारण जो तकनीकी बाधाएं सामने आई थीं, उनका समाधान निकालकर परियोजना को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने बैरकपुर स्टेशन पर पहले हटाए गए फुटओवर ब्रिज के पुनर्निर्माण की मांग की। इसके अलावा 14 नंबर रेलगेट पर फ्लाईओवर, बैरकपुर और टीटागढ़ स्टेशनों पर लिफ्ट और एस्केलेटर, यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय तथा टीटागढ़ स्टेशन के आधुनिकीकरण का भी प्रस्ताव रखा।

कौस्तभ बागची ने यह भी मांग की कि अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल बैरकपुर स्टेशन परिसर में शहीद मंगल पांडे, राष्ट्रगुरु सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और साहित्यकार विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय की प्रतिमाएं स्थापित की जाएं।

खड़दह के लिए फ्लाईओवर, मॉडल स्टेशन और अंडरपास की मांग

खड़दह के विधायक और मंत्री कल्याण चक्रवर्ती ने खड़दह स्टेशन के पास स्थित रेलवे फाटक पर फ्लाईओवर निर्माण की मांग उठाई। उनका कहना है कि वर्षों से लोगों को जाम और आवाजाही की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने खड़दह स्टेशन को मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित करने और उसका नाम बदलकर ‘श्रीपाट खड़दह’ करने का प्रस्ताव भी दिया। उनके अनुसार, खड़दह वैष्णव परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और यहां धार्मिक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं।

कल्याण चक्रवर्ती ने सूर्यसेन और पश्चिमपाड़ा क्षेत्र के बीच एक अंडरपास बनाने का सुझाव भी दिया, जिससे लोगों को रेलवे लाइन पार करने में सुविधा होगी। इसके अलावा उन्होंने खड़दह स्टेशन पर मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव तथा लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग भी रखी।

रेल मंत्री के सामने प्रस्ताव रखे

बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने इलाकों की जरूरतों के अनुसार रेलवे से जुड़ी मांगें रेल मंत्री के सामने रखीं। अब स्थानीय लोगों की निगाहें रेल मंत्रालय पर टिकी हैं।

यदि बरानगर-बैरकपुर मेट्रो विस्तार, नए फ्लाईओवर, स्टेशन आधुनिकीकरण और फ्रेट टर्मिनल जैसी योजनाओं को मंजूरी मिलती है, तो इससे न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि पूरे औद्योगिक क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई गति मिल सकती है।

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