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जयपुर में अतिक्रमण हटाओ अभियान से पहले हाई अलर्ट, इंटरनेट सेवाएँ बंद

मोबाइल इंटरनेट 24 घंटे के लिए बंद, रैपिड एक्शन फोर्स और भारी पुलिस बल की तैनाती से शहर में कड़ा पहरा

जयपुर : राजस्थान की राजधानी जयपुर में अतिक्रमण को लेकर सोमवार को होने वाले एक बड़े प्रशासनिक अभियान से पहले प्रशासन ने पूरी तरह सतर्कता बढ़ा दी है। शहर के जगतपुरा क्षेत्र में जयपुर विकास प्राधिकरण (जयपुर विकास प्राधिकरण) सड़क से अवैध कब्जा हटाने के लिए अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने जा रहा है। सड़क विस्तार और कब्जा मुक्त करने की इस योजना के तहत कुछ धार्मिक संस्थानों को हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसी आशंका के चलते प्रशासन ने मोबाइल इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी हैं और शहर के संवेदनशील इलाकों में लगभग 3,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।

जयपुर विकास प्राधिकरण (जयपुर विकास प्राधिकरण) ने लंबे समय से चल रही सड़क विस्तार परियोजना को लागू करने के लिए यह कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। प्रशासन की सूची में जिन क्षेत्रों को शामिल किया गया है, उनमें चार धार्मिक स्थल भी बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये संरचनाएँ सरकारी जमीन और सड़क क्षेत्र पर अवैध रूप से बनी हुई हैं और यातायात में बाधा उत्पन्न कर रही हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रविवार मध्यरात्रि से जयपुर उत्तर और जयपुर पूर्व पुलिस जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएँ 24 घंटे के लिए निलंबित कर दी गई हैं। प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें, फर्जी खबरें या भड़काऊ संदेश फैलने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

सोमवार सुबह से ही पूरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घेर लिया है। बड़ी संख्या में पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स, राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी और विशेष इकाइयों के जवान तैनात किए गए हैं। कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और प्रवेश मार्गों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

प्रशासन की चिंता का एक बड़ा कारण पिछले कुछ महीनों में जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसक घटनाएँ हैं। पिछले दिसंबर में चौमू क्षेत्र में एक धार्मिक स्थल के पास अवैध कब्जा हटाने के दौरान भारी पथराव हुआ था, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे और सौ से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था। उस घटना के बाद भी इंटरनेट सेवाएँ बंद करनी पड़ी थीं।

इस बार भी प्रशासन को आशंका है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान तनाव फैल सकता है। इसी कारण खुफिया एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और ड्रोन तथा सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई है।

राजनीतिक स्तर पर भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों के कुछ वर्गों ने प्रशासनिक कदमों पर सवाल उठाए हैं, जबकि राजस्थान सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह विकास परियोजना का हिस्सा है और सभी कार्रवाई कानून के अनुसार की जा रही है। सरकार का तर्क है कि सड़क विस्तार और शहरी विकास परियोजनाओं के मार्ग में आने वाले सभी अवैध निर्माणों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की जा रही है।

फिलहाल जयपुर में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कानून-व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास किया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बल भी तैनात किया जाएगा।

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