नयी दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेन्दु शेखर राय ने सोमवार, 8 जून 2026 को अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने न सिर्फ राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी, बल्कि टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया।सुबह संसद भवन पहुंचकर उन्होंने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंपा। साथ ही ममता बनर्जी को भी इस्तीफे की जानकारी दी। 77 वर्षीय सुखेन्दु शेखर राय टीएमसी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे और 2011 से लगातार राज्यसभा सांसद थे। यह इस्तीफा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में टीएमसी की भारी हार के महज एक महीने बाद आया है।
2026 चुनाव में क्या हुआ?
मई 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की। कुल 294 सीटों में भाजपा ने 207 सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 2 और अन्य छोटी पार्टियों को कुछ सीटें मिलीं। यह टीएमसी की 15 साल पुरानी सत्ता का अंत था। ममता बनर्जी खुद भवानीपुर सीट से हार गईं। सुखेन्दु शेखर राय ने इस नतीजे को “ऐतिहासिक जनादेश” बताया और कहा कि भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जनता का गुस्सा साफ दिखा।
इस्तीफे की वजह का खुलासा
सुखेन्दु शेखर राय ने मीडिया से बातचीत और लिखित बयान में साफ कहा कि यह फैसला अचानक नहीं था। वे लंबे समय से पार्टी के अंदरूनी माहौल से नाराज थे और सही मौके का इंतजार कर रहे थे।
पार्टी में भ्रष्टाचार बढ़ गया है और पारदर्शिता खत्म हो गई है। ईमानदार और पुराने नेताओं को किनारे किया जा रहा है। पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और जनता से पूरी तरह कट गई है। आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो गया है। आई-पैक जैसी सलाहकार एजेंसी का पार्टी पर अत्यधिक प्रभाव है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले (2024) में खुलकर अपनी राय रखने और सड़क पर विरोध प्रदर्शन करने के बाद उनकी भूमिका सीमित कर दी गई। चुनाव हारने के बाद भी पार्टी ने कोई गंभीर समीक्षा नहीं की। उन्होंने पहले भी चेतावनी दी थी कि अगर यही हाल रहा तो टीएमसी “कुछ दिनों में खत्म” हो सकती है।
अब तक का राजनीतिक सफर
सुखेन्दु शेखर राय टीएमसी के पुराने और कद्दावर चेहरे माने जाते थे। 2011 में ममता बनर्जी की सरकार बनने के बाद वे राज्यसभा पहुंचे और पार्टी के चीफ व्हिप की जिम्मेदारी भी संभाली। वे लंबे समय से पार्टी के संगठनात्मक कामों से जुड़े रहे। आरजी कर मामले के बाद उनकी जिम्मेदारियां कम हुईं, जिसके बाद असंतोष बढ़ा।
पार्टी पर क्या असर होगा?
यह इस्तीफा टीएमसी के लिए बड़ा झटका है। पार्टी में पहले से ही बगावत के सुर तेज थे। करीब 60 विधायकों ने अलग समूह बना लिया है और ऋतब्रत बनर्जी जैसे नेताओं के इर्द-गिर्द नई गतिविधियां शुरू हुई हैं। अब सांसद स्तर पर भी विद्रोह सामने आया है।टीएमसी के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सदस्य थे। अब एक राज्यसभा सीट खाली हो गई है, जिसे भाजपा भर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह आंतरिक कलह का पहला संसदीय संकेत है। और भी कई नेता (कोएल मल्लिक समेत) के इस्तीफे या बगावत की अटकलें लग रही हैं।
आगे की रणनीति क्या होगी?
इस्तीफे के बाद सुखेन्दु शेखर राय ने अपने भविष्य की कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई। उन्होंने कहा कि 59 साल के लंबे राजनीतिक जीवन के बाद अब सोच-विचार करके आगे का फैसला लेंगे। कुछ रिपोर्ट्स में उन्होंने नई भाजपा सरकार के विकास कार्यों की सराहना भी की है। ममता बनर्जी इस समय दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में व्यस्त हैं। पार्टी नेतृत्व अब संगठनात्मक बदलावों और आंतरिक समीक्षा पर विचार कर रहा है। यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति को आने वाले दिनों में और प्रभावित करेगी। पुराने और अनुभवी नेता भी असंतोष जता रहे हैं, जो टीएमसी की मौजूदा चुनौतियों को साफ दिखाता है।