नई दिल्लीः देश में सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल सरकार सोमवार को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) से जुड़ने जा रही है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल इस योजना को लागू करने वाला देश का 36वां राज्य या केंद्रशासित प्रदेश बन जाएगा।
इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के बीच नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
नड्डा की मौजूदगी में होगा समझौता
आधिकारिक बयान के अनुसार एमओयू हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा करेंगे। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
क्या है आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना?
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना केंद्र प्रायोजित स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसके तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर उपलब्ध कराया जाता है। यह सुविधा द्वितीयक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराने के लिए दी जाती है। योजना के खर्च का वहन केंद्र और राज्य सरकारें निर्धारित अनुपात में करती हैं। सामान्य राज्यों में यह अनुपात 60:40 है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का हिस्सा क्रमशः 90:10 रखा गया है।
लाखों लोगों को मिलेगा आर्थिक सुरक्षा कवच
वर्ष 2018 में शुरू की गई यह योजना देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरी है। इससे लोगों के इलाज पर होने वाला व्यक्तिगत खर्च कम हुआ है और सरकारी व निजी सूचीबद्ध अस्पतालों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच बेहतर हुई है। पश्चिम बंगाल में योजना लागू होने के बाद राज्य के लाखों पात्र लाभार्थियों को गंभीर बीमारी के इलाज पर होने वाले भारी खर्च से वित्तीय सुरक्षा मिलेगी। साथ ही उन्हें देशभर में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोर्टेबिलिटी का लाभ भी प्राप्त होगा।
राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मिलेगा बल
बयान में कहा गया है कि आयुष्मान भारत योजना के लागू होने से पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य तंत्र को भी मजबूती मिलेगी। इससे लोगों की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी तथा स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा और प्रभाव दोनों व्यापक होंगे।