नई दिल्लीः देश में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जैसे-जैसे नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक आ रही है, सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने और उम्मीदवारों को मैदान में उतारने में जुटे हैं। यह चुनाव 10 राज्यों की 24 सीटों के लिए 18 जून को होगा।
चुनाव आयोग ने 1 जून को इस चुनाव की अधिसूचना जारी की थी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून तय की गई है। यह चुनाव कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और मेघालय में हो रहा है। इसके अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा की एक-एक सीट पर उपचुनाव भी शामिल हैं।
इन चुनावों के जरिए संसद के ऊपरी सदन में राजनीतिक संतुलन पर असर पड़ने की संभावना है, इसलिए सभी दल इसे बेहद गंभीरता से ले रहे हैं।
भाजपा की रणनीति और उम्मीदवार चयन
भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश से अपने दो प्रमुख नेताओं-राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और पार्टी नेता रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया।
नामांकन के बाद दोनों नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार जताया। तरुण चुग ने कहा कि वे पार्टी के कार्यकर्ता हैं और संगठन के निर्देशों का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है।
कांग्रेस की सूची और राजनीतिक संकेत
कांग्रेस ने भी विभिन्न राज्यों में संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। पार्टी ने कर्नाटक से मंसूर अली खान और पवन खेड़ा, मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन, राजस्थान से नीरज डांगी, तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती और झारखंड से प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है।
पवन खेड़ा ने बेंगलुरु में नामांकन के बाद कहा कि वे राज्य और राष्ट्रीय मुद्दों पर लगातार काम करते रहेंगे। मंसूर अली खान ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि कांग्रेस अनुभव और नए विचारों का संतुलन लेकर चल रही है। वहीं मीनाक्षी नटराजन ने इस चुनाव को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई बताया।
अन्य दलों की भूमिका और राजनीतिक माहौल
आंध्र प्रदेश में जन सेना पार्टी के उम्मीदवार लिंगमानेनी रमेश ने भी नामांकन दाखिल किया और पार्टी प्रमुख पवन कल्याण, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।
मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि भाजपा को क्रॉस वोटिंग का कोई डर नहीं है, जबकि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सतर्क नजर आ रही है। झारखंड में मंत्री सुदिव्य कुमार ने अपनी पार्टी से दो सीटों पर सक्रिय भागीदारी की अपील की, हालांकि अंतिम फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेना है।
राज्यसभा चुनाव 2026 अब केवल संख्या बल का खेल नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक दलों की रणनीति, संगठनात्मक ताकत और क्षेत्रीय संतुलन का भी परीक्षण बन गया है। नामांकन प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ चुनावी तस्वीर धीरे-धीरे स्पष्ट होती जा रही है और आने वाले दिनों में मुकाबला और रोचक होने की संभावना है।