कोलकाता नगर निगम के मेयर के पद से फिरहाद हकीम ने कल यानी 5 जून को इस्तीफा दे दिया। उससे ठीक पहले ही विधाननगर के मेयर पद से कृष्णा चक्रवर्ती ने इस्तीफा देते हुए बतौर पार्षद काम करने की इच्छा जतायी।
इसके बाद से ही नगर निकाय चुनाव को लेकर अटकलें तेज हो गयी थी क्योंकि मेयर के नहीं रहने से न सिर्फ नगर निकाय का काम बाधित होगा बल्कि आम जनता को मिलने वाली सेवाएं भी प्रभावित होंगी।
इस बीच बंगाल की नगर व नगरोन्नयन मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट अभी किसी भी नगर निगम या पालिका में चुनाव नहीं करवाए जाएंगे।
मीडिया से बात करते हुए शनिवार (6 जून) को अग्निमित्रा पॉल ने कहा, "अभी किसी भी नगर पालिका या नगर निगम में हमने चुनाव करवाने के बारे में नहीं सोचा है। चुनाव तभी होगा जब चुनाव आयोग कहेगा।" उन्होंने आगे कहा कि अभी अभी हमलोग प्रशासक बैठाएंगे।
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कोलकाता नगर निगम और विधाननगर नगर पालिका में भी प्रशासक बैठाया जाएगा। पर कौन होगा इन दोनों नगर निकाय का प्रशासक? और कब तक होगी उसकी नियुक्ति?
इस बारे में बात करते हुए अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि नगर निकाय का जो कमिश्नर होगा, वहीं प्रशासक भी होगा। नियुक्ति के संबंध में मंत्री ने कहा कि हम जल्द से जल्द प्रशासक नियुक्ति की प्रक्रिया को पूरी कर लेंगे। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासक बैठाने में जितनी देर होगी, हम जनता को सेवाएं नहीं प्रदान कर सकेंगे।
इसलिए हम जितनी जल्दी संभव प्रशासक बैठाने का काम पूरा कर देंगे ताकि जनता को सेवाएं मिलती रहे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि एक प्रशासक कैसे काम करेगा। अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि स्थानीय विधायकों को सलाहकार के तौर पर रखा जाएगा। विधायकों की सलाह से ही प्रशासक निकाय क्षेत्र से जुड़े सभी कार्यों को संपन्न करेगा। फिलहाल हमारी यहीं योजना है।
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सुनिए यहां मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने नगर निकाय चुनाव के बारे में क्या कहा :-
#WATCH | Kolkata: On the resignation of Kolkata Mayor, West Bengal Minister Agnimitra Paul says, "We haven't thought about holding elections for the municipality or corporation just yet. Elections will take place when the Election Commission announces them; for now, we will https://t.co/5jz2vjb0xY pic.twitter.com/kEITn316FF
— ANI (@ANI) June 6, 2026
वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता नगर निगम (KMC) को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है जिसमें KMC से यह स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उसके बोर्ड को भंग क्यों न किया जाए।
राज्य के शहरी विकास और नगर मामलों के विभाग ने KMC को कोलकाता नगर निगम की धारा, 1980 के प्रावधानों के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें KMC से तीन दिनों के भीतर यह बताने को कहा गया है कि उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।