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अमेरिका में परमाणु ऊर्जा का नया युग, भारत को भी मिल सकते हैं अत्याधुनिक छोटे परमाणु रिएक्टर

अमेरिकी माइक्रो-रिएक्टर ने हासिल की बड़ी सफलता

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 07, 2026 20:48 IST

वाशिंगटनः अमेरिका में विकसित एक छोटे परमाणु रिएक्टर ने महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार 'क्रिटिकलिटी' प्राप्त कर ली है। इसका अर्थ है कि रिएक्टर में स्व-निर्भर परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया सफलतापूर्वक शुरू हो गई है। विशेषज्ञ इसे अमेरिकी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में चार दशक से अधिक समय बाद उभर रही नई तकनीकी क्रांति और 'दूसरे परमाणु पुनर्जागरण' की शुरुआत मान रहे हैं।

निजी अमेरिकी कंपनी एंटारेस न्यूक्लियर द्वारा विकसित मार्क-0 प्रदर्शन रिएक्टर ने 4 जून को यह उपलब्धि हासिल की। यह परियोजना निर्धारित समय से लगभग एक माह पहले पूरी हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निजी क्षेत्र को उन्नत परमाणु रिएक्टर विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं और अमेरिका इन तकनीकों को भारत सहित विभिन्न देशों को उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है।

भारत समेत दुनिया के कई देशों पर अमेरिका की नजर

न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट की अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मारिया कोर्सनिक ने कहा कि अमेरिका पारंपरिक बड़े रिएक्टरों जैसे एपी-1000 के साथ-साथ छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) और माइक्रो-रिएक्टर भी भारत को उपलब्ध कराने में रुचि रखता है। उनके अनुसार ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न आकार और क्षमता वाले परमाणु समाधान उपलब्ध हैं।

अमेरिका में विकसित हो रहे माइक्रो-रिएक्टर कुछ सौ किलोवाट से लेकर 1.2 मेगावाट तक बिजली उत्पादन करने में सक्षम हैं। इनकी खासियत यह है कि इन्हें मॉड्यूलर रूप में तैयार कर विमान के जरिए दुनिया के किसी भी हिस्से में पहुंचाया जा सकता है। अमेरिका भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में भी परमाणु ऊर्जा के उपयोग की संभावनाओं पर काम कर रहा है।

स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से पहले तकनीकी प्रदर्शन की तैयारी

मार्क-0 रिएक्टर उन तीन छोटे रिएक्टरों में पहला है, जिनसे अमेरिका 4 जुलाई को स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से पहले नई परमाणु क्षमताओं का प्रदर्शन करना चाहता है। अन्य दो परियोजनाओं में वेस्टिंगहाउस का ई-विंसी और रेडिएंट का कैलिडोस माइक्रो-रिएक्टर शामिल हैं। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि 4 जून का दिन अमेरिकी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के पुनरुत्थान में ऐतिहासिक साबित हो सकता है।

ट्रंप प्रशासन ने आसान किए नियम

पिछले वर्ष राष्ट्रपति ट्रंप ने नई परमाणु प्रौद्योगिकियों के विकास में नियामकीय बाधाएं कम करने के लिए कई कार्यकारी आदेश जारी किए थे। इन आदेशों के तहत उन्नत रिएक्टर डिजाइनों और परियोजनाओं को मंजूरी देने का अधिकार ऊर्जा विभाग को दिया गया, जबकि पहले यह जिम्मेदारी न्यूक्लियर रेगुलेटरी कमीशन के पास थी।

परमाणु ऊर्जा के नए उपयोगों पर जोर

मारिया कोर्सनिक के अनुसार पिछले तीन दशकों में अमेरिका में बिजली की मांग अपेक्षाकृत स्थिर रही। इसी दौरान फ्रैकिंग तकनीक के प्रसार से प्राकृतिक गैस सस्ती हुई और बिजली उत्पादन में उसका उपयोग बढ़ने के कारण परमाणु क्षेत्र की वृद्धि धीमी पड़ गई। उन्होंने कहा कि अब ईंधन आपूर्ति और रिएक्टर डिजाइनों में तेजी से नवाचार हो रहा है। कुछ रिएक्टर जल-शीतित होंगे, कुछ पिघले हुए लवण (मोल्टेन सॉल्ट) से ठंडे किए जाएंगे, जबकि कुछ गैस आधारित शीतलन प्रणाली का उपयोग करेंगे। कोर्सनिक के अनुसार परमाणु ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग उच्च तापमान वाली भाप तैयार करने, औद्योगिक प्रक्रियाओं को ऊर्जा उपलब्ध कराने तथा हाइड्रोजन उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। परमाणु तकनीक उद्योगों को कई प्रकार के ऊर्जा विकल्प उपलब्ध कराती है।

भारत का लक्ष्य: 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा

भारत में संभावनाओं को देखते हुए अमेरिकी परमाणु उद्योग का एक प्रतिनिधिमंडल भी अवसरों की तलाश के लिए भारत का दौरा कर चुका है। भारत ने दिसंबर 2025 में सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम पारित किया, जिसके बाद परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी का मार्ग खुला और वैश्विक मानकों के अनुरूप नई दायित्व व्यवस्था लागू हुई।

भारत ने वर्ष 2047 तक परमाणु ऊर्जा से 100 गीगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान क्षमता लगभग 9 गीगावाट है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े रिएक्टरों के साथ-साथ इस्पात और सीमेंट जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों हेतु छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के उपयोग की योजना बनाई जा रही है। देश में तीन प्रकार के छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित किए जा रहे हैं। इनमें 200 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर), 55 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला एसएमआर तथा हाइड्रोजन उत्पादन के लिए 5 मेगावाट तापीय क्षमता वाला उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर शामिल हैं। इन सभी का विकास स्वदेशी तकनीक से किया जा रहा है।

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