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ईरान की जब्त संपत्तियों से मुआवजा देने पर विचार, ट्रंप प्रशासन की नई रणनीति

लेबनान और खाड़ी क्षेत्र में ताजा घटनाक्रम ने स्थायी शांति समझौते की संभावनाओं को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

वॉशिंगटन डी.सी. : अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के जवाब में ईरान ने अरब क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाया था। संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन जैसे देशों पर लगातार मिसाइलें दागी गई थीं। अब अमेरिका विदेशों में मौजूद ईरान की संपत्तियों का उपयोग उन हमलों से हुए नुकसान की भरपाई के लिए करने की संभावना पर विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस के एक सूत्र के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने यह दावा किया है।

अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ईरान के हमलों से मित्र देशों को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार करें। इसके साथ ही यह भी जांचने को कहा गया है कि क्या उस क्षतिपूर्ति के लिए ईरान की जब्त संपत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि बेसेंट ने किन विशेष संपत्तियों का उल्लेख किया है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने अपने देश में मौजूद ईरान की बड़ी मात्रा में संपत्तियां जब्त कर ली थीं। तेहरान शांति प्रस्ताव के तहत उन संपत्तियों को वापस करने की मांग कर रहा है। ऐसे समय में ट्रंप प्रशासन की यह पहल वार्ताओं को और अधिक जटिल बना सकती है, ऐसा जानकारों का एक वर्ग मानता है।

इसी बीच, रविवार तड़के अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर हमला किया। होरमुज़ जलडमरूमध्य के निकट गोरुक और केश्म द्वीपों पर ईरान के कई रडार प्रतिष्ठान मौजूद हैं। अमेरिकी सेना ने इन ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर ड्रोन हमले करती रही है। इसी खतरे का मुकाबला करने के लिए इन रडार प्रणालियों को नष्ट किया गया।

तेहरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। कुवैत के अनुसार, घनी आबादी वाले क्षेत्रों के ऊपर से सात बैलिस्टिक मिसाइलें गुजरी, हालांकि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। बहरीन ने भी अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने की जानकारी दी है।

इन घटनाओं के बीच कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। ईरान विदेशों में जब्त अपनी संपत्तियों को वापस प्राप्त करना चाहता है। इसके अलावा वह तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील और होरमुज़ जलडमरूमध्य में अपने प्रभाव को बनाए रखने के मुद्दे पर भी जोर दे रहा है।

दूसरी ओर युद्धविराम लागू रहने के बावजूद इज़रायल ने रविवार को फिर लेबनान में सैन्य कार्रवाई की। इज़रायली पक्ष का दावा है कि दक्षिणी लेबनान में दो अधिकारियों सहित तीन सैनिकों की मौत हुई है। हालांकि हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की गई है। इज़रायल का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र और लेबनान में जारी तनाव यह संकेत देता है कि मौजूदा युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलना आसान नहीं होगा। क्षेत्रीय संघर्ष के विभिन्न मोर्चों पर लगातार जारी सैन्य गतिविधियां इस प्रक्रिया को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।

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