वॉशिंगटन डी.सी. : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष सलाहकार भारतीय मूल के श्रीराम कृष्णन ने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। वे व्हाइट हाउस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी नीतियों के निर्माण और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी रूपरेखा तैयार करने के कार्य से जुड़े हुए थे। शनिवार को उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने इस्तीफे की जानकारी दी और लिखा कि वे जून के अंत में अपनी जिम्मेदारी छोड़ देंगे। हालांकि उन्होंने अपने इस फैसले के पीछे का स्पष्ट कारण साझा नहीं किया।
श्रीराम कृष्णन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास और उसके नियमन से संबंधित राष्ट्रीय नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। इसके अलावा, वे एआई से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सरकारी नीति निर्धारण की प्रक्रियाओं में भी सक्रिय रूप से शामिल थे। अपने सोशल मीडिया संदेश में उन्होंने कहा कि इस महीने के अंत में व्हाइट हाउस में उनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा और कुछ समय के विराम के बाद वे एआई क्षेत्र की बड़ी चुनौतियों के समाधान पर पुनः काम करना चाहते हैं।
इस समय ट्रंप प्रशासन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों में सरकार की प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ाने पर विचार कर रहा है। इसी बीच श्रीराम कृष्णन के इस्तीफे की खबर सामने आई है। शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उनका उद्देश्य अमेरिकी जनता के हितों की रक्षा करना है। बताया जा रहा है कि वे आगामी सप्ताह में कई प्रमुख एआई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक भी कर सकते हैं।
हालांकि इस्तीफा देने के बावजूद श्रीराम कृष्णन पूरी तरह प्रशासन से अलग नहीं होंगे। व्हाइट हाउस के एआई और क्रिप्टो मामलों के प्रमुख अधिकारी डेविड सैक्स ने कहा है कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है, लेकिन वे सलाहकार के रूप में बाहर से प्रशासन से जुड़े रहेंगे।
टेस्ला और स्पेसएक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क ने भी उनके कार्य की सराहना की है। उन्होंने कहा कि तकनीकी दुनिया में श्रीराम का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
श्रीराम कृष्णन ने अपने कार्यकाल के दौरान गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एक्सएआई जैसी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों को इस बात के लिए राजी किया था कि किसी भी नए एआई मॉडल को बाजार में लाने से पहले सरकारी विशेषज्ञ उसकी जांच कर सकें। इस पहल को उनकी बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा था। ऐसे में उनके अचानक इस्तीफे से विशेषज्ञों के एक वर्ग में भी आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है।