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मीरा आंद्रेवा ने जीता फ्रेंच ओपन 2026 का खिताब, 34 साल बाद बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड

6-3, 6-2 से जीतकर रूसी खिलाड़ी ने जीती ट्रॉफी।

पेरिस : फ्रेंच ओपन के इतिहास में 34 वर्षों बाद एक बार फिर 19 वर्षीय खिलाड़ी ने महिला एकल खिताब अपने नाम किया है। शनिवार को 19 वर्ष और 39 दिन की रूसी टेनिस खिलाड़ी मीरा आंद्रेवा ने रोलां गैरो का खिताब जीतकर नया इतिहास रच दिया। इससे पहले वर्ष 1992 में इसी उम्र में मोनिका सेलेस ने फ्रेंच ओपन की ट्रॉफी जीती थी। मीरा आंद्रेवा के करियर का यह पहला ग्रैंड स्लैम खिताब है।

महिला एकल फाइनल में मीरा ने पोलैंड की माया चवालिन्स्का को एकतरफा मुकाबले में 6-3, 6-2 से पराजित किया। वर्तमान में विश्व रैंकिंग में मीरा सातवें स्थान पर हैं, जबकि माया चवालिन्स्का की रैंकिंग 114वीं है।

माया ने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वालीफाइंग दौर से मुख्य ड्रॉ में प्रवेश किया था। उन्होंने पूरे अभियान में केवल एक सेट गंवाया और लगातार नौ मैच जीतकर फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि, फाइनल में वह कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल नहीं हो सकीं। बाएं हाथ से खेलने वाली माया के सामने मीरा पूरी तरह हावी रहीं।

वर्ष 2021 में एम्मा राडुकानू ने क्वालीफाइंग दौर से निकलकर यूएस ओपन का खिताब जीतकर इतिहास रचा था। माया चवालिन्स्का उस उपलब्धि की बराबरी नहीं कर सकीं।

फाइनल के दौरान एक दिलचस्प संयोग भी देखने को मिला। पुरस्कार वितरण समारोह में पूर्व फ्रेंच ओपन चैंपियन मेरी पियर्स ट्रॉफी देने के लिए मौजूद थीं। उसी समय मीरा अपनी कोच कोंचिता मार्तिनेज को खुशी से गले लगाए हुए थीं।

गौरतलब है कि वर्ष 2000 के फ्रेंच ओपन फाइनल में मेरी पियर्स ने कोंचिता मार्तिनेज को हराकर खिताब जीता था। इस बार अपनी शिष्या मीरा आंद्रेवा की जीत के साथ स्पेन की कोंचिता मार्तिनेज ने मानो उस हार का हिसाब बराबर कर लिया।

उधर रविवार को पुरुष एकल खिताब के लिए एलेक्जेंडर ज्वेरेव और फ्लावियो कोबोली आमने-सामने होंगे। दोनों खिलाड़ियों ने अब तक अपने करियर में कोई ग्रैंड स्लैम खिताब नहीं जीता है।

जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव के लिए यह चौथा अवसर है जब वह किसी ग्रैंड स्लैम के फाइनल में पहुंचे हैं। इससे पहले तीनों मौकों पर वह ट्रॉफी जीतने से चूक गए थे। ऐसे में इस बार रोलां गैरो के फाइनल में जीत दर्ज कर अपने लंबे इंतजार को समाप्त करने के लिए वह पूरी तरह तैयार हैं।

दूसरी ओर, 24 वर्षीय इतालवी खिलाड़ी फ्लावियो कोबोली पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंचे हैं। दसवीं वरीयता प्राप्त कोबोली के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें अपेक्षाकृत कम थकान का सामना करना पड़ा है।

दरअसल, उन्हें सेमीफाइनल मुकाबला खेलना ही नहीं पड़ा। उनके प्रतिद्वंद्वी आर्नाल्डी को बुखार होने के कारण मुकाबले से हटना पड़ा था, जिसके चलते कोबोली बिना कोर्ट पर उतरे फाइनल में पहुंच गए।

इस बारे में कोबोली ने कहा, “फाइनल से पहले मिला यह अतिरिक्त आराम निश्चित रूप से मुझे कुछ फायदा पहुंचा सकता है। हालांकि, सेमीफाइनल नहीं खेलने का एक नकारात्मक पक्ष भी है। इससे मैच लय और मानसिक एकाग्रता पर असर पड़ सकता है।”

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