काठमांडू : हिंदी भाषा के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार तथा भारत-नेपाल के बीच साहित्यिक संबंधों को सुदृढ़ बनाने में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिनेशचंद्र प्रसाद 'दीनेश' को प्रतिष्ठित 'भारत-नेपाल हिंदी सेवी सम्मान' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, शिलांग (मेघालय) द्वारा आयोजित भारत-नेपाल साहित्यिक यात्रा के दौरान प्रदान किया गया।
नेपाल के पोखरा स्थित पृथ्वी हॉल, होटल शारा में 5 जून से 9 जून तक आयोजित 21वें लेखक मिलन शिविर में यह सम्मान समारोह संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भारत और नेपाल के साहित्यकारों, लेखकों तथा हिंदी प्रेमियों ने भाग लेकर साहित्यिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा दिया।
पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी की ओर से जारी सम्मान-पत्र में कहा गया कि डॉ. दिनेशचंद्र प्रसाद 'दीनेश' ने हिंदी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विभिन्न साहित्यिक यात्राओं, संगोष्ठियों और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में निरंतर योगदान दिया है। साथ ही, उनके रचनात्मक कार्यों ने साहित्यिक संवाद को समृद्ध करने तथा मानवीय मूल्यों के संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सम्मान-पत्र में उनके साहित्यिक अवदान की सराहना करते हुए कहा गया कि उन्होंने अपने सृजनात्मक कार्यों के माध्यम से हिंदी साहित्य को नई दिशा देने का प्रयास किया है। भारत और नेपाल के साहित्यकारों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत बनाने में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। इस अवसर पर उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर साहित्यिक प्रगति की कामना की गई।
यह सम्मान पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के अध्यक्ष बिमल बजाज तथा 21वें लेखक मिलन शिविर के संयोजक डॉ. अकेलाभाई के हस्ताक्षर से प्रदान किया गया। उल्लेखनीय है कि पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी शिलांग एक सांस्कृतिक, सामाजिक और शैक्षणिक संस्था है, जो अधिनियम XXI, 1860 के तहत पंजीकृत है तथा हिंदी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों के संवर्धन के लिए विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन करती रही है।