नई दिल्ली : दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय विमानक्षेत्र में रविवार की शाम अचानक आए तेज तूफान और बारिश के कारण भारी अव्यवस्था फैल गई। ग्राउंड सपोर्ट उपकरण (ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट) के बेकाबू होकर खिसक जाने से पार्किंग क्षेत्र में खड़े विमानों को नुकसान पहुँच गया।
सूचना के अनुसार यह घटना टर्मिनल-2 क्षेत्र में शाम लगभग 4 बजकर 40 मिनट पर हुई, जब तेज आंधी और बारिश अचानक शुरू हो गई। उसी समय एयर इंडिया के तीन नैरोबॉडी विमान पार्किंग बे में खड़े थे। तेज हवाओं के कारण कुछ ग्राउंड सपोर्ट उपकरण—जिनमें यात्रियों के चढ़ने-उतरने की सीढ़ियाँ भी शामिल थीं—अपने स्थान से हटकर नियंत्रण खो बैठे और सीधे विमानों से जा टकराए। इसके चलते तीनों विमानों को क्षति पहुँची।
हवाई अड्डा सूत्रों के अनुसार, जिन उपकरणों ने विमानों को टक्कर मारी, उनमें कुछ एयर इंडिया इंजीनियरिंग से संबंधित थे और कुछ इंडिगो से जुड़े हुए थे। तेज हवा के दबाव के कारण ये सभी उपकरण अपनी जगह से खिसक गए और दुर्घटना का कारण बने।
एक वायरल वीडियो में साफ देखा गया कि एक पैसेंजर स्टेपलैडर तेज रफ़्तार से हवा में बहते हुए पार्किंग में खड़े एयर इंडिया के विमान से टकरा जाता है। एक अन्य वीडियो में हवाई अड्डे के कर्मचारी उन उपकरणों को रोकने के लिए दौड़ते दिखाई देते हैं, लेकिन तेज़ हवा के कारण वे उन्हें नियंत्रित करने में असफल रहते हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और घटना को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
एयर इंडिया ने इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन कंपनी के सूत्रों के अनुसार क्षतिग्रस्त तीन विमानों में से दो को जल्द ही मरम्मत के बाद सेवा में वापस लाया जा सकेगा। हालांकि तीसरे विमान को अधिक नुकसान हुआ है, इसलिए उसकी मरम्मत में अधिक समय लगने की संभावना है।
हवाई अड्डा संचालक संस्था का कहना है कि घटना से पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) की ओर से मौसम के अचानक खराब होने को लेकर कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी गई थी। इसी कारण ग्राउंड उपकरणों को सुरक्षित तरीके से बांधने या अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने का अवसर नहीं मिल पाया।
घटना के बाद जांच शुरू कर दी गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि सुरक्षा व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद भारी उपकरण तेज तूफान में कैसे खिसककर विमानों से टकरा गए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाने चाहिए।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अचानक बदलने वाला मौसम हवाई अड्डों के ग्राउंड ऑपरेशन के लिए कितना बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है। सौभाग्य से इस घटना में किसी भी यात्री या कर्मचारी को चोट नहीं लगी और नुकसान केवल विमानों तथा उपकरणों तक ही सीमित रहा।