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हर थाना के मालखाना में कितने हैं हथियार? 2 सप्ताह में CID के पास जमा करनी होगी रिपोर्ट

निर्देश दिया गया है कि सभी थानों में इस संबंधी जानकारी और आंकड़े प्रतिदिन नियमित रूप से दर्ज किए जाएं।

By Moumita Bhattacharya

May 16, 2026 11:27 IST

विभिन्न मामलों में बंदूक, गोलियां और विस्फोटक बरामद होने के बावजूद क्या थानों के मालखाना रजिस्टर में उनकी सही जानकारी दर्ज की जाती है? हथियारों के हिसाब-किताब में गड़बड़ी को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें उठ चुकी हैं।

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। निर्देश दिया गया है कि सभी थानों में इस संबंधी जानकारी और आंकड़े प्रतिदिन नियमित रूप से दर्ज किए जाएं।

रखना होगा हर रिकॉर्ड

नए निर्देशानुसार प्रत्येक थाने को यह पूरा रिकॉर्ड रखना होगा कि किस मामले में कितने हथियार बरामद हुए और कितने विस्फोटक जब्त किए गए। साथ ही यह भी दर्ज करना होगा कि ये सभी सामान कहां और किस स्थिति में सुरक्षित रखे गए हैं। बरामद हथियारों को उचित सुरक्षा में मालखाने में रखा जा रहा है या नहीं, इसकी नियमित जांच थाने के ओसी और आईसी करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी डीएसपी स्तर के अधिकारी करेंगे।

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नए निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पूरे सिस्टम पर जिला पुलिस अधीक्षक और कमिश्नरेट क्षेत्रों में पुलिस आयुक्त निगरानी रखेंगे। सिर्फ कागजी रिपोर्ट पर भरोसा न करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को खुद थानों में जाकर मालखाने का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद सभी रिपोर्ट एडीजी, सीआईडी को भेजी जाएंगी।

दो सप्ताह में सीआईडी को भेजनी होगी रिपोर्ट

बताया जाता है कि शुक्रवार (15 मई) से ही इन निर्देशों को लागू करने के आदेश दिए गए हैं। थानों का निरीक्षण करने के बाद अगले दो सप्तार के अंदर राज्य के सभी थानों की रिपोर्ट सीआईडी को भेजनी होगी। इस बाबत जानकारों का कहना है कि पहले जब्त किए गए विस्फोटक या हथियारों के रखरखाव को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। कुछ मामलों में जांच पूरी होने से पहले ही सामग्री नष्ट होने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसी स्थितियां भी सामने आई हैं।

बताया जाता है कि मालखाना रजिस्टर का सही तरीके से रखरखाव होने से पुलिस प्रशासन की पारदर्शिता बढ़ेगी। किसी मामले को अगर अदालत में चुनौती दी जाती है तो पुलिस को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे आम लोगों का पुलिस पर भरोसा भी बढ़ेगा। साथ ही बरामद विस्फोटकों के गलत हाथों में पहुंचने का खतरा भी कम हो जाएगा।

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