नई दिल्लीः दिल्ली में जारी एक ताजा रिपोर्ट में बिहार मंत्रिमंडल को लेकर कई अहम खुलासे सामने आए हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और बिहार इलेक्शन वॉच की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, पुनर्गठित बिहार कैबिनेट के लगभग आधे मंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि लगभग सभी मंत्री करोड़पति श्रेणी में आते हैं।
रिपोर्ट में 7 मई को हुए मंत्रिमंडल पुनर्गठन के बाद 35 में से 31 मंत्रियों के स्व-घोषित हलफनामों का विश्लेषण किया गया है। इसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित मंत्रियों के शपथपत्र शामिल हैं, जो 2025 के विधानसभा और विधान परिषद चुनावों से पहले दाखिल किए गए थे।
48 प्रतिशत मंत्रियों पर आपराधिक मामलों की जानकारी
रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषित 31 मंत्रियों में से 15 मंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जो लगभग 48 प्रतिशत है। इनमें से 9 मंत्री गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं, जिनकी हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत बताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनता दल (यूनाइटेड) के अशोक चौधरी और भारतीय जनता पार्टी के प्रमोद कुमार को हलफनामा देने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि वे विधान परिषद के मनोनीत सदस्य हैं।
इसके अलावा दीपक प्रकाश (आरएलएम) और निशांत कुमार (जदयू) के विवरण को शामिल नहीं किया गया, क्योंकि वे वर्तमान में बिहार विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं।
संपत्ति के आंकड़ों में बड़ा खुलासा
रिपोर्ट में बताया गया कि 31 मंत्रियों में से 28 मंत्री करोड़पति हैं। मंत्रियों की औसत घोषित संपत्ति 6.32 करोड़ रुपये दर्ज की गई है।
संपत्ति के मामले में भारतीय जनता पार्टी की मंत्री रमा निषाद सबसे आगे रहीं, जिनकी कुल संपत्ति 31.86 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मंत्री संजय कुमार की संपत्ति सबसे कम 22.30 लाख रुपये दर्ज की गई है।
शिक्षा और आयु प्रोफाइल का विश्लेषण
रिपोर्ट के अनुसार 8 मंत्री (26 प्रतिशत) ने 10वीं से 12वीं तक की शिक्षा घोषित की है। वहीं 22 मंत्री (71 प्रतिशत) स्नातक या उससे अधिक योग्यता रखते हैं। एक मंत्री ने डिप्लोमा धारक होने की जानकारी दी है। आयु वर्ग के अनुसार 6 मंत्री 30 से 50 वर्ष की उम्र के बीच हैं, जबकि 25 मंत्री 51 से 80 वर्ष आयु वर्ग में आते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बिहार मंत्रिमंडल में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है। 35 मंत्रियों में केवल 5 महिलाएं हैं, जो कुल संख्या का लगभग 14 प्रतिशत है।
एडीआर और बिहार इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बिहार कैबिनेट में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले मंत्रियों की संख्या उल्लेखनीय बनी हुई है, जबकि अधिकांश मंत्री संपत्ति के मामले में करोड़पति श्रेणी में आते हैं। यह अध्ययन चुनावी हलफनामों के आधार पर तैयार किया गया है, जो जनप्रतिनिधियों की पारदर्शिता और प्रोफाइल को उजागर करता है।