🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

फर्जी धमकी भरे ई-मेल को भेजने वाला 'डॉन' आखिर है कौन? 6 राज्यों की पुलिस को है तलाश

पुलिस का मानना है कि जिस व्यक्ति ने ये फर्जी धमकी वाले ई-मेल भेजे हैं, वह किसी आतंकवादी संगठन का हिस्सा नहीं है।

By Somnath Mondal, Posted By : Moumita Bhattacharya

Feb 27, 2026 10:29 IST

पिछले 2 सालों में कभी स्कूल-कॉलेज तो कभी ऑफिस-अदालत को बम से उड़ा देने की धमकी भरा ई-मेल कई बार भेजा जा चुका है। इन ई-मेल को भेजने वाला व्यक्ति आखिर है कौन? भले ही 11 मुल्कों की पुलिस इस व्यक्ति को नहीं ढूंढ रही है लेकिन पश्चिम बंगाल के अलावा कम से कम 5 अन्य राज्यों की पुलिस जरूर इस 'डॉन' को ढूंढ़ रही है। जासूसी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिस व्यक्ति ने ये फर्जी धमकी वाले ई-मेल भेजे हैं, वह किसी आतंकवादी संगठन का हिस्सा नहीं है।

यहां तक कि उक्त व्यक्ति के चाइनीज साइबर गैंग के साथ मिले होने के सबूत भी नहीं मिले हैं। पुलिस का मानना है कि इसके पीछे जिस व्यक्ति का हाथ है वह दक्षिण भारत का रहने वाला है। टॉर ब्राउजर का इस्तेमाल कर VPN के माध्यम से वह ये ई-मेल भेज रहा है। कभी ISI और कभी माओवादी के नाम पर इन फर्जी धमकी वाले ई-मेल को भेजा जा रहा है।

इस सप्ताह में ही विभिन्न जिलों के अदालतों, पासपोर्ट और राज्य के पोस्टऑफिसों में ऐसे धमकी वाले ई-मेल आ चुके हैं जिसमें ऑफिस में RDX रखे होने और उन्हें बम से उड़ा देने की फर्जी धमकी दी गयी थी। अब जासूसी विभाग असली अपराधी को ढूंढ निकालने की तैयारियों में जुट चुका है।

पिछले 2 सालों के दौरान कई बार स्कूलों से लेकर इंडियन म्यूजियम तक को बम से उड़ा देने का फर्जी ई-मेल आ चुका है। डार्क वेब का इस्तेमाल कर ई-मेल भेजने की वजह से अब तक जासूसी विभाग इनके पीछे छिपे असली अपराधी तक नहीं पहुंच पाया था।

इस पद्धति को साइबर वर्ल्ड में 'अनियन राउटिंग' कहा जाता है, क्योंकि इसमें प्याज की तरह ही कई स्तर होते हैं। इसके माध्यम से डार्क वेब में प्रवेश किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें सभी जानकारियां व डाटा प्याज की तरह ही कई चरणों में एन्क्रिप्शन के कई स्तरों से सुरक्षित किया होता है। इसे विभिन्न नोड अथवा राउटर के माध्यम से ही पार किया जा सकता है। इसमें प्रवेश करने वाले व्यक्ति अथवा प्रेरक का परिचय भी गुप्त रहता है। इस वजह से ही असली अपराधी का परिचय प्राप्त करना टेढ़ी खीर है।

टॉर अथवा VPN क्या है?

  1. इस्तेमालकर्ता का असली IP छिपा होता है।
  2. डाटा के प्रत्येक स्तर पर अलग एन्क्रिप्शन रहने की वजह से उन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है।
  3. विदेशी सर्वर का इस्तेमाल होने की वजह से जानकारियां कई देशों के सर्वर से होकर गुजरती है।
  4. पहचान छिपाने के लिए डार्क वेब का इस्तेमाल कर ई-मेल भेजा जाता है।

साइबर विशेषज्ञ संदीप सेनगुप्त का कहना है कि प्रॉक्सी सर्वर, टॉर या VPN का इस्तेमाल कर अगर कोई पश्चिम बंगाल में बैठकर भी ई-मेल भेजता है तो ऐसा ही लगेगा कि इन्हें पाकिस्तान से भेजा गया है। इन्हें पकड़ना बहुत मुश्किल काम जरूर है लेकिन असंभव नहीं है। कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच चल रही है। इसके पीछे जो लोग हैं, उन्हें जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

Prev Article
बंगाल सरकार का बड़ा फैसला, SIR की वजह से मरने वाले 61 लोगों के परिजनों को दी जाएगी नौकरी
Next Article
जादवपुर यूनिवर्सिटी में फिर से लगा दूसरे वर्ष के छात्र का रैगिंग करने का आरोप

Articles you may like: