SIR की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न कारणों से जिन लोगों की मौत हो गयी थी, उनके परिवारों के लिए पश्चिम बंगाल राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने ऐसे परिवारों के एक सदस्य को नौकरी देने का फैसला लिया है। इस बाबत जानकारी देते हुए AITC (ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस) के आधिकारिक X हैंडल पर पोस्ट शेयर किया गया है।
इस पोस्ट में AITC की ओर से बताया गया है कि बिना कोई योजना बनाए SIR करने की वजह से बंगाल में बड़ी संख्या में लोगों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। SIR की वजह से हुई इस परेशानी के खिलाफ ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और (Abhishek Banerjee) ने शुरू से ही आवाज उठायी है। SIR में मरने वाले लोगों के साथ दोनों लगातार खड़े रहे हैं। अब उनके परिजनों के साथ खड़े होते हुए राज्य की तृणमूल सरकार ने उन्हें नौकरी देने का फैसला लिया है।
बताया जाता है कि SIR में विभिन्न कारणों से मरने वाले 61 लोगों के परिवार के सदस्यों को राज्य सरकार ने नौकरी देने का फैसला लिया है। अपने पोस्ट में AITC ने कटाक्ष करते हुए लिखा है कि 'मोदी की गारंटी' की वजह से आम लोगों को जो घाव मिला है, उस पर 'दीदी की गारंटी' मरहम लगा रही है।
The coercive, unplanned, and utterly heartless SIR exercise has already claimed innocent lives, ordinary people pushed to the brink by unbearable stress, panic, and crushing workload.
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) February 26, 2026
From the very first day, Smt. @MamataOfficial and Shri @abhishekaitc have led the fierce,… pic.twitter.com/P1R11ei0z6
गौरतलब है कि राज्य में SIR की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से विभिन्न कार्यों से जुड़े लोगों ने काम का अत्यधिक दबाव होने का आरोप लगाया है। बड़ी संख्या में आम नागरिक दस्तावेजों को लेकर चिंता जता रहे थे। किसी का नाम अगर मतदाता सूची के मसौदे में नहीं रहा या नाम कट जाने के डर से परेशान और तनावग्रस्त होने का आरोप भी लगाया गया है। इसके साथ ही कभी SIR के काम का अत्यधिक दबाव होने और कभी दस्तावेजों के पूरे न होने से तनाव में आकर आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाने का आरोप भी लगाया जाता रहा है।
तृणमूल कांग्रेस ने शुरुआत से ही आरोप लगाया है कि SIR की प्रक्रिया को लेकर कोई योजना नहीं बनायी गयी थी। इस वजह से तृणमूल ने लगातार चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। मामला अदालत तक भी पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद दलीलें रखी और सवाल भी पूछा। इसके बाद ही राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों के एक सदस्य को नौकरी देने का फैसला लिया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंत्रिमंडल की बैठक के बाद ही यह फैसला लिया गया है।