नैरोबी: केन्या के कुछ लोगों को रूस में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उन्हें यूक्रेन के युद्ध में लड़ने के लिए भेज दिया। इस मामले में केन्या पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
मामले जुड़े फेस्टस ओम्ब्वाम्बा को इथियोपिया सीमा के पास उत्तरी केन्या के मोयाले शहर से पकड़ा गया। उस पर मानव तस्करी का शक है। गुरुवार को नैरोबी की आतंकवाद-रोधी अदालत में उस पर पिछले साल 25 केन्याई लोगों को रूस भेजने का मामला दर्ज किया है। पुलिस प्रवक्ता माइकल मुचिरी ने बताया कि रूस से लौटने के बाद ओम्ब्वाम्बा केन्या से भागने की कोशिश कर रहा था।
भर्ती किए गए लोगों ने बताया कि ओम्ब्वाम्बा ने उनके टूरिस्ट वीज़ा और टिकट की व्यवस्था की थी। पहली बातचीत के करीब दो हफ्ते बाद उन्हें वीज़ा मिला और वे रूस चले गए।
तीन केन्याई युवकों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि ओम्ब्वाम्बा ने उन्हें रूस भेजा था। जब यूक्रेन युद्ध में लोगों के लापता होने और मारे जाने की खबरें आने लगीं और परिवारों ने विरोध शुरू किया तो वह गायब हो गया।
केन्या सरकार के अनुसार, 1,000 से ज्यादा केन्याई लोगों को रूस की ओर से यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए भर्ती किया गया। इनमें से 89 अब भी मोर्चे पर हैं, 39 अस्पताल में हैं, 28 लापता हैं और कुछ लोग घर लौट आए हैं। सरकार ने एक मौत की पुष्टि की है।
संसद में पेश एक खुफिया रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ केन्याई और रूसी अधिकारियों ने संदिग्ध भर्ती एजेंसियों के साथ मिलकर लोगों को युद्ध में भेजा। हालांकि नैरोबी में रूसी दूतावास ने इन आरोपों से इनकार किया है। उसका कहना है कि उसने युद्ध के लिए किसी को वीज़ा जारी नहीं किया।
केन्या के विदेश मंत्री मुसालिया मुदावादी ने कहा है कि वे इस मामले पर बातचीत के लिए रूस जाएंगे। उन्होंने बताया कि यूक्रेन की जेलों में बंद केन्याई नागरिकों को छुड़ाने और रूस में मौजूद लोगों को वापस लाने की कोशिश जारी है।
सरकार का मानना है कि ओम्ब्वाम्बा की गिरफ्तारी इस तरह की भर्ती रोकने की दिशा में बड़ा कदम है। रूस के मोर्चे से भागकर वहां के केन्याई दूतावास में शरण लेने वाले जॉन कामाउ ने बताया कि नैरोबी में एक घर में कई लोगों को रूस भेजने से पहले रखा गया था, जहां उसकी मुलाकात ओम्ब्वाम्बा से हुई थी।
एक अन्य युवक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ओम्ब्वाम्बा ज्यादातर फोन पर या आमने-सामने बात करता था ताकि कोई लिखित सबूत न रहे। उस युवक को रूस में प्लंबर की नौकरी का वादा किया गया था, लेकिन वहां पहुंचते ही उसका पासपोर्ट ले लिया गया और उसे सैन्य कैंप में रखकर बाद में युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया।
अगस्त 2025 में रूस गए एक युवक के भाई ने बताया कि उसके भाई ने यात्रा से पहले ओम्ब्वाम्बा से हुई बातचीत के संदेश दिखाए थे। ओम्ब्वाम्बा ने उससे पैसे मांगे और बैंक खाते की जानकारी दी। हालांकि, जो अनुबंध दिया गया उसमें किसी दूसरी कंपनी का नाम था और उसमें नौकरी “सशस्त्र सुरक्षा गार्ड” की बताई गई थी।
युवक के भाई ने बताया कि यात्रा के दिन उसने हवाई अड्डे पर ओम्ब्वाम्बा को पासपोर्ट बांटते हुए देखा था। वह युवक पिछले साल से परिवार के संपर्क में नहीं है और माना जा रहा है कि वह यूक्रेन में युद्धबंदी है।