'बंकिमदा' विवाद हुआ अतीत। बंगाल के महान व्यक्तियों को संबोधित करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को विरोधियों के आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। अब उसी महान व्यक्ति की अगली पीढ़ी ने भाजपा का दामन थाम लिया है। महान उपन्यासकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्र चट्टोपाध्याय गुरुवार को भाजपा में शामिल हो गए।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य और पश्चिम बंगाल चुनाव के भारप्राप्त नेता व केंद्रीय मंत्री भुपेंद्र यादव की उपस्थिति में सुमित्र चट्टोपाध्याय भाजपा में शामिल हुए।
सुमित्र चट्टोपाध्याय उपन्यासकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के भाई पूर्णचंद्र चट्टोपाध्याय के 5वीं पीढ़ी के वंशज हैं।
संसद में भाषण देते समय साहित्यकार और वंदे मातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को 'बंकिमदा' संबोधित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विवादों में फंस गए थे। इस बात को लेकर काफी हंगामा खड़ा हो गया था। विरोधियों ने आरोप लगाया था कि इस तरह का संबोधन कर उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का अपमान किया है।
हालांकि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इन आरोपों को मानने से इनकार कर दिया था। ऐसी स्थिति में उन्हीं बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज को भाजपा में शामिल करवाकर भाजपा क्या कोई संदेश देना चाहती है? अगर हां तो कौन सा संदेश?
गुरुवार को भाजपा की ओर से इस मामले में कोई बयान जारी नहीं किया गया है। सुमित्र चट्टोपाध्याय भाजपा में क्यों शामिल हुए? एई समय ऑनलाइन से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि भाजपा में शामिल होने के कई कारण हैं। उनमें से जो कारण प्रमुख है वह है राज्य में बेरोजगारी की समस्या। सुमित्र ने लंबे समय तक श्रम विभाग में काम किया है।
उन्होंने एम्प्लाइमेंट एक्सचेंज की जिम्मेदारी भी संभाली है। राज्य में बेरोजगारों की स्थिति को देखकर वह काफी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि काम न देकर सिर्फ भत्ता देकर बेरोजगारों को कोई मदद नहीं की जा रही है। भत्ता देने के बावजूद एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज बेरोजगारों की समस्या को दूर करने की दिशा में कोई काम नहीं कर पा रहा है।
उनका मानना है कि राज्य में काम का माहौल और रोजगार के मौके बनाने के लिए तथ्यों के आधार पर योजना बनाने की जरूरत है। राज्य की स्थिति को बदलने के लिए और खासतौर पर नौकरी के अवसर बनाने की उम्मीद से ही उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया है। सुमित्र चट्टोपाध्याय ने कहा कि मैंने अपने पेशेवर जीवन में दो सरकार देखा है।
मुझे लगता है कि भाजपा साम्प्रदायिक पार्टी नहीं है। मुझे लगता है कि दूसरी पार्टियां साम्प्रदायिकता का कार्ड ज्यादा खेलती है। उनका मानना है कि भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यक समुदाय के नागरिक भी अच्छा जीवन जीते हैं।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पहले वाली सरकार के जमाने में भी कोई न कोई भ्रष्टाचार जरूर हुआ था। उन भ्रष्टाचारों में बड़े-बड़े नेताओं के नाम भी शामिल रहे हैं लेकिन वर्तमान में भाजपा के प्रमुख नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में उंगली नहीं उठायी जा सकती है।