चुनाव आयोग राष्ट्रीय मतदाता दिवस (National Voter's Day 2026) मना रहा है। इस साल धूमधाम के साथ मतदाता दिवस मनाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर तीखा वार किया है।
रविवार को अपने आधिकारिक X हैंडल से एक पोस्ट कर मुख्यमंत्री ने लिखा, 'भारत का चुनाव आयोग आज (25 जनवरी) राष्ट्रीय मतदाता दिवस मना रहा है जो एक करुण मजाक जैसा लग रहा है। हिज़ मास्टर्स वॉयस के तौर पर आयोग इस समय आम लोगों के मताधिकार को लूटने में व्यस्त है और वे राष्ट्रीय मतदाता दिवस मना रहे हैं। मैं इससे स्तंभित, विस्मित और विचलित हूं।'
ममता बनर्जी ने एक बार फिर से दावा करते हुए कहा कि उनके प्रभु (चुनाव आयोग) भाजपा की ओर से विरोधियों को बर्बाद करना चाहते हैं और भारतीय गणतंत्र की नींव पर प्रहार करना चाहते हैं। इनका दुस्साहस है कि मतदाता दिवस का पालन कर रहे हैं। वहीं इस बारे में CEO मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा, 'मुख्यमंत्री अगर कोई प्रतिक्रिया दे रही हैं तो वह ECI को दे रही हैं। मैं इस पर टिप्पणी करने वाला कोई नहीं होता।'
मुख्यमंत्री का दावा है कि चुनाव गणतंत्र का उत्सव है लेकिन चुनाव आयोग 'पक्षपात, एक तरफा गैरकानूनी काम कर रहा है'। बड़ी संख्या में माइक्रो ऑब्जॉर्वर को भेजना गणतंत्र को ध्वस्त करने जैसा है।
SIR की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही राज्य और चुनाव आयोग के बीच करीब डेढ़ महीने से संघर्ष चल रहा है। तृणमूल बार-बार SIR को लेकर आपत्ति जता रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि दो सालों का काम 2 महीने में करने की कोशिश में कोई योजना नहीं बनायी गयी है। इस वजह से आम लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। खास तौर पर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही राज्य भर से तरह-तरह की शिकायतें सामने आ रही है।
Election Commission of India is celebrating National Voters' Day today, and what a tragic farce that is! The Commission -- working as His Master's Voice-- is busy now in snatching away people's voting rights, and they have the temerity to celebrate Voters' Day! I am deeply…
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) January 25, 2026
ममता बनर्जी ने अपने X हैंडल पर लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के बदले में नियम-कानून के आधार पर आम लोगों के मताधिकार की रक्षा करने के बदले में चुनाव आयोग अब लॉजिकल गड़बड़ियों के नाम पर नए-नए बहाने बना रहा है। जनता पर अत्याचार किया जा रहा है, उनको मताधिकार से वंचित किया जा रहा है और उनका मताधिकार छीन लिया जा रहा है।'
ममता बनर्जी ने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक 130 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके लिए उन्होंने चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे चुनाव आयोग का अत्याचार करार दिया। 80-90 सालों के वृद्धों को जिस प्रकार से सुनवाई की लाइन में खड़ा किया जा रहा है उसे लेकर भी उन्होंने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने लिखा है कि इसे आपने आम नागरिकों के लिए NRC की प्रक्रिया बना दिया है। अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों के लिए यह सबसे ज्यादा पीड़ादायक है। इस वजह से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मानना है कि मतदाता दिवस को मनाने का अधिकार चुनाव आयोग को आज नहीं है।