कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान प्रशासनिक स्थानांतरण को लेकर चुनाव आयोग और राज्य सचिवालय के बीच फिर से मतभेद उभऱकर सामने आया है। मंगलवार को राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र देकर 'बिना सूचना तीन अधिकारियों को स्थानांतरित करने' पर निर्वाचन आयोग (ईसी) ने सीधे ऐतराज जताया। 'सर'-प्रक्रिया से जुड़े इन तीन अधिकारियों के स्थानांतरण के आदेश को तुरंत रद्द कर आज, बुधवार दोपहर तीन बजे तक आयोग को रिपोर्ट देने के लिए मुख्य सचिव से कहा गया था।
राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा ने पत्र में मुख्य सचिव को लिखा, 'पूरी प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के समय ही राज्य के मुख्य सचिवों को बताया गया था कि इससे जुड़े किसी भी अधिकारी को तबादला नहीं किया जा सकता। यदि करना हो तो निर्वाचन आयोग से अनुमति लेनी होगी लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने यह नीति अपनाई नहीं। जो आयोग के निर्देशों की अवहेलना में शामिल है।' हाल ही में राज्य सरकार ने अश्विनी कुमार यादव, रणधीर कुमार और स्मिता पांडे को स्थानांतरित किया है। इन तीनों IAS अधिकारियों को आयोग ने जिला रोल पर्यवेक्षक का कार्य सौंपा है। अश्विनी कुमार उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर, रणधीर कुमार उत्तर 24 परगना और कोलकाता उत्तर, और स्मिता पांडे पूर्व व पश्चिम बर्दवान और बीरभूम जिलों के रोल पर्यवेक्षक के जिम्मे हैं।
निर्वाचन आयोग के इस पत्र के कारण ‘सर’ प्रक्रिया में राज्य प्रशासन की भूमिका को लेकर नया विवाद शुरू हो गया। इससे पहले ही पिछले रविवार को आयोग ने पत्र भेजकर बशीरहाट उत्तर विधानसभा क्षेत्र के एआरओ सुमित्र प्रतीम प्रधान को निलंबित करने का आदेश दिया। सुमित्र प्रतीम बशीरहाट–2 ब्लॉक के बीडीओ हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने आयोग की अनुमति लिए बिना 11 अतिरिक्त एआरओ नियुक्त किए। मुख्य सचिव को मंगलवार तक उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई लागू करने का निर्देश आयोग ने दिया था। राज्य सरकार ने इसके संदर्भ में दोषी बीडीओ के खिलाफ क्या कार्रवाई की, यह उस दिन रात तक ज्ञात नहीं हुआ। अब तबादला मुद्दे पर नवान्न क्या जवाब देता है, यह समय बताएगा।