गुरुवार (19 फरवरी) से रमजान का पवित्र महीना शुरू हो चुका है। इस महीने की सबसे बड़ी खासियत रोजा शुरू करने से पहले सहरी और शाम को अजान की आवाज सुनकर रोजा तोड़ना। इसके बाद पूरे परिवार, दोस्तों व जान-पहचान के लोगों के साथ मिलकर बैठकर इफ्तार करना।
आमतौर पर इफ्तार के समय कई तरह के पकवानों के साथ-साथ मौसमी फलों को भी शामिल किया जाता है। इसे स्वास्थ्य के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, जो पूरे दिन के निर्जला उपवास के बाद शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में मददगार साबित होता है। लेकिन इस साल तो...
इस साल रमजान का महीना शुरू होने से पहले से ही बाजार में फलों की कीमतें आसमान छूने लगी थी। सेव, अनार, अंगुर, पपीता, चिकू, नारंगी, तरबूज, अमरुद से लेकर खजूर तक...हर तरह के फल की कीमत इतनी बढ़ गयी है कि आम आदमी को इन्हें खरीदने के लिए काफी सोच-विचार करना पड़ रहा है।
फलों की कीमतों के बढ़ने का असर सिर्फ रोजादारों पर ही नहीं बल्कि हर उस आम व्यक्ति पर भी पड़ रहा है जो मौसमी फल खरीदना चाहता है। फिर चाहे किसी बीमार के परिजन हो या मौसमी फलों का कोई शौकीन ही क्यों न हो। यहीं वजह है कि रमजान की शुरुआत होने से पहले से ही लोग घरों में फलों को खरीदकर जमा कर लेते हैं ताकि कुछ दिनों तक महंगे फल न खरीदने पड़े।
बुधवार को जब रमजान का चांद नजर आया, उसके बाद से ही बाजारों में लोगों ने भीड़ जमाना शुरू कर दिया था लेकिन फलों की कीमतें सुनकर लोगों ने अपना माथा ही पीट लिया।
दूसरे सालों के मुकाबले इस साल ज्यादा कीमत
हावड़ा ग्रामीण के उलुबेड़िया, बागनान, आमता, उदयनारायणपुर, श्यामपुर, जगतबल्लभपुर आदि इलाकों के फलों की दुकानों में लगभग हर तरह की फल व सब्जियों की कीमतें प्रति किलो 20 से 50 रुपया बढ़ गयी हैं। उलुबेड़िया और बागनान के फल व सब्जी विक्रेताओं ने भी स्वीकार किया कि इस साल रमजान के महीने में फलों व सब्जियों की कीमतें अन्य वर्षों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। पर क्यों फलों की कीमतें इतनी ज्यादा है?
इस सवाल का जवाब देते हुए उलुबेड़िया के एक फल विक्रेता ने बताया कि इस साल रमजान का महीना ऐसे समय में शुरू हुआ है, जब अधिकांश फलों का मौसम खत्म हो चुका है। साल के इस समय में बाजारों में सिर्फ अंगूर ही ठीक-ठाक मिलते हैं। लेकिन इस साल अंगूर भी खट्टे साबित हो रहे हैं क्योंकि फसल अच्छी नहीं हुई है। इसलिए इस समय बाजार में बिकने वाले अधिकांश फल ही कोल्ड स्टोरेज वाले हैं। इसी वजह से कीमतें भी कई गुना बढ़ गयी है।
एक अन्य फल विक्रेता ने कहा कि काफी लोग खजूर और खुरमा खाकर रोजा तोड़ते हैं। इसलिए रमजान के समय खजूर की मांग भी ज्यादा होती है और यहीं वजह है कि इस समय खजूर की कीमतें भी काफी बढ़ गयी है। सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले खजूर अम्बर, आजुवा, सुक्करी और कलमी होते हैं जिन्हें अरब से मंगवाया जाता है।
हालांकि एक अन्य विक्रेता का मानना है कि दूसरे सालों की तुलना में इस साल खजूर की कीमत ठीक-ठाक है। लेकिन रोजादारों से लेकर आमलोगों तक इस समय यहीं सोच रहे हैं कि अगर रमजान की शुरुआत में ही फलों की कीमतें इतनी ज्यादा हैं तो बाकी महीना कैसे बीतेगा?