पंचला (हावड़ा): राज्य सरकार की कई योजनाओं-कन्याश्री, मिड-डे मील, सबुजसाथी साइकिल और कक्षा 11 में टैबलेट वितरण के बावजूद स्कूल ड्रॉपआउट की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। इसी चुनौती को गंभीरता से लेते हुए पंचला पंचायत समिति ने इस बार एक नई और व्यावहारिक पहल शुरू की है। पंचायत समिति ने यह जानने के लिए एक विशेष जांच कमेटी गठित की है कि आखिर किन हालात की वजह से छात्र-छात्राएं बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
स्कूल छोड़ने के पीछे के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कारणों की पड़ताल के लिए गंगाधरपुर महाविद्यालय के प्रिंसिपल जगमोहन बसंतिया और कॉलेज के प्रोफेसरों के नेतृत्व में छह सदस्यीय सलाहकार समिति बनाई गई है। यह टीम सीधे छात्रों के घर जाकर उनसे और उनके अभिभावकों से बातचीत करेगी। टीम जानने की कोशिश करेगी कि इस समस्या की जमीनी हकीकत आखिर क्या है।
पंचायत समिति का कहना है कि इस सर्वे का उद्देश्य केवल ड्रॉपआउट के कारणों की पहचान करना नहीं है। पूरे पंचला ब्लॉक की शिक्षा व्यवस्था की समग्र समीक्षा करना भी है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं-जैसे शौचालय, खेल का मैदान-मौजूद हैं या नहीं। शिक्षकों की भूमिका कैसी है, माता-पिता बच्चों की पढ़ाई को लेकर कितने जागरूक हैं और आर्थिक हालात शिक्षा को किस हद तक प्रभावित कर रहे हैं।
इसके साथ ही पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने के लिए पंचायत समिति ने शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। पंचला पंचायत समिति क्षेत्र के 26 हायर सेकेंडरी स्कूलों में पहले ही शिक्षकों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जा चुका है। अब प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक कुल 125 स्कूलों को इस निगरानी के दायरे में लाने की पहल की जा रही है।
पंचला पंचायत समिति के अध्यक्ष अबू बक्कर मलिक ने कहा कि जब तक शिक्षा की गुणवत्ता नहीं सुधरेगी, तब तक समाज प्रगति नहीं कर सकता है। उन्होंने बताया कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पंचायत समिति ठोस कदम उठाएगी और विस्तृत रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भी भेजी जाएगी। सलाहकार समिति के प्रमुख जगमोहन बसंतिया ने बताया कि कुछ स्कूलों का दौरा पहले ही किया जा चुका है और हेडमास्टर, शिक्षकों तथा छात्रों से बातचीत के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचला इलाका लेस उद्योग के लिए जाना जाता है, जहां बच्चे कम उम्र से ही काम में लग जाते हैं। आर्थिक मजबूरी और जल्दी कमाई की उम्मीद भी स्कूल छोड़ने की एक बड़ी वजह बन रही है। पंचायत समिति की इस पहल को इलाके के विधायक गुलसन मलिक ने भी सराहा है। अब देखना होगा कि इस पहल से स्कूल ड्रॉपआउट की समस्या पर कितना असर पड़ेगा।