🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

मतुआ बहुल सीटों पर बदले रुझान, भाजपा को झटका, तृणमूल कांग्रेस ने शुरुआती बढ़त से चौंकाया

नागरिकता और वादों के बावजूद मतुआ इलाकों में भाजपा को नुकसान, चुनावी समीकरण में बड़ा बदलाव संकेत।

By रजनीश प्रसाद

May 04, 2026 12:01 IST

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चल रही मतगणना के बीच शुरुआती रुझानों ने बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। जिन मतुआ बहुल सीटों पर भाजपा को मजबूत माना जा रहा था वहीं अब पार्टी पिछड़ती नजर आ रही है। यह स्थिति इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इस समुदाय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष फोकस रहा है।

राज्य में मतुआ समुदाय एक बड़ा और प्रभावशाली अनुसूचित जाति वोट बैंक है। करीब 17-18 प्रतिशत आबादी वाले इस समुदाय का असर 11 विधानसभा सीटों पर सीधा है जबकि लगभग 60 सीटों पर यह निर्णायक भूमिका निभाता है। उत्तर 24 परगना, नदिया, हावड़ा, दक्षिण 24 परगना और दिनाजपुर के सीमावर्ती इलाकों में इस समुदाय की बड़ी उपस्थिति है।

सोमवार सुबह करीब 9:50 बजे तक आए रुझानों के अनुसार मतुआ बहुल 11 सीटों में से 7 सीटों के आंकड़े सामने आए हैं। इनमें सत्ताधारी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने 4 सीटों पर बढ़त बना ली है जबकि भाजपा केवल 2 सीटों पर आगे है। यह परिणाम चौंकाने वाला है क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 11 में से 10 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि टीएमसी को सिर्फ एक सीट मिली थी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मतुआ समुदाय पर भाजपा की पकड़ को अब तक मजबूत माना जाता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी भी अपने बंगाल दौरे के दौरान इस समुदाय से जुड़े धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं। हाल ही में 26 अप्रैल को उन्होंने ठाकुरनगर स्थित मतुआ महासंघ के मुख्य मंदिर ‘ठाकुरबाड़ी’ में पूजा-अर्चना की थी जो इस समुदाय का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत मतुआ समुदाय को नागरिकता देने की गारंटी भी दी है। उन्होंने कहा था कि इस समुदाय को डरने की जरूरत नहीं है और उन्हें भारत में सम्मानजनक नागरिकता और स्थायी पहचान मिलेगी।

मतुआ बहुल प्रमुख सीटों में उत्तर 24 परगना की बोंगांव दक्षिण, बोंगांव उत्तर, गायघाटा, बागदा और स्वरूपनगर शामिल हैं। वहीं नदिया जिले की कृष्णगंज, रानीघाट उत्तर पूर्व और हरिणघाटा सीटें भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इन क्षेत्रों में नागरिकता जैसे मुद्दों के कारण भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।

फिलहाल, शुरुआती रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि मतुआ बहुल क्षेत्रों में इस बार राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं जिससे चुनाव परिणाम पर बड़ा असर पड़ सकता है।

Articles you may like:

Election