कोलकाताः पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में कराया जाएगा। पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतों की गिनती 4 मई को की जाएगी।
राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। दोनों दलों ने चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार कर ली है और कई बड़े मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर हमले तेज कर दिए हैं।
इस बार चुनावी चर्चा के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (एसआईआर), अवैध घुसपैठ, भ्रष्टाचार के आरोप, धार्मिक ध्रुवीकरण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे बने हुए हैं।
मतदाता सूची संशोधन ने बदला चुनावी समीकरण
चुनाव से पहले मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव ने राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। नवंबर 2025 से शुरू हुई विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची से लगभग 63.67 लाख नाम हटाए गए हैं। इस वजह से राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई है। मतलब यह कि कुल मतदाताओं में लगभग 8.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा करीब 60.07 लाख नाम अभी जांच के दायरे में हैं, जिन पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
मतदाता सूची में यह बदलाव खास तौर पर सीमावर्ती जिलों मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना के साथ-साथ कुछ शहरी क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिला है। इन इलाकों में चुनावी मुकाबला पहले से ही काफी तीखा माना जाता है।
भाजपा का कहना है कि यह प्रक्रिया अवैध घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए जरूरी थी। वहीं टीएमसी का आरोप है कि इसके जरिए खास समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। इस विवाद ने चुनावी रणनीति और बूथ स्तर के समीकरणों को भी प्रभावित किया है।
चुनाव प्रचार में एसआईआर और घुसपैठ के मुद्दे
इस चुनाव में अवैध घुसपैठ का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है। भाजपा इसे चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2026 में मालदा की एक सभा में आरोप लगाया था कि राज्य में टीएमसी सरकार के संरक्षण के कारण अवैध प्रवास को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की जनसांख्यिकी में बदलाव आया है और सामाजिक तनाव बढ़ा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि अभी मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं, लेकिन अगर भाजपा सत्ता में आती है तो अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भाजपा का दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 50 लाख से अधिक घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करती है। पार्टी का कहना है कि घुसपैठ का मुद्दा उठाकर राजनीतिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश की जा रही है और अल्पसंख्यक समुदाय में डर का माहौल बनाया जा रहा है। सीमावर्ती जिलों में यह मुद्दा चुनावी चर्चा का अहम हिस्सा बन चुका है। भ्रष्टाचार और शिक्षक भर्ती घोटाले पर विपक्ष का हमला। राज्य की राजनीति में भ्रष्टाचार के आरोप भी इस बार प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) भर्ती घोटाले की हो रही है। इस मामले में अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 25,000 से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। हालांकि इसके बाद भी इस मामले की राजनीतिक गूंज जारी है और विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठाकर राज्य सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
भाजपा का आरोप है कि यह घोटाला राज्य सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण है। वहीं टीएमसी इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं को चुनावी एजेंडा बना रही है। यह मामला खास तौर पर युवाओं और नौकरी की तलाश कर रहे अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी का कारण बना हुआ है।
धार्मिक ध्रुवीकरण और कानून-व्यवस्था भी चर्चा में
पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले धर्म की भूमिका अपेक्षाकृत सीमित मानी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक ध्रुवीकरण का असर बढ़ा है। भाजपा टीएमसी पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का आरोप लगाती है। हालांकि टीएमसी का कहना है कि बीजेपी समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति कर रही है। इसके अलावा मतुआ समुदाय की नागरिकता से जुड़ी चिंताएं भी चुनावी विमर्श में शामिल हो गई हैं।
महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी लगातार उठाया जा रहा है। आरजी कर अस्पताल कांड और साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज से जुड़े मामलों को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं।
सरकार का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस तंत्र को मजबूत किया गया है और हेल्पलाइन सेवाओं का विस्तार किया गया है। हालांकि विपक्ष अपराध के मामलों में बढ़ोतरी का आरोप लगा रहा है।
मौजूदा विधानसभा का राजनीतिक गणित
वर्तमान विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के पास सहयोगियों सहित लगभग 223 विधायक हैं, जबकि बीजेपी के पास करीब 64–65 विधायक हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनी थी। अन्य दलों में इंडियन सेक्युलर फ्रंट और एक निर्दलीय उम्मीदवार को एक-एक सीट मिली थी। बाद में दलबदल और राजनीतिक घटनाक्रम के कारण विधानसभा का मौजूदा समीकरण बदल गया। ऐसे में 2026 का चुनाव राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम चुनाव माना जा रहा है।