घर से बाहर निकलते ही फोटोग्राफर घेर लेते हैं। चारों ओर कैमरों की फ्लैश और पोज देने की मांग। सितारों को एक साथ कई जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं। एक ओर उनका पेशेवर जीवन होता है, जहां उन्हें घंटों मेहनत करनी पड़ती है। साथ ही अपनी सेहत का भी ध्यान रखना होता है। रोजमर्रा की इस भागदौड़ के बीच पर्दे के नायक-नायिकाओं को माता-पिता होने की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है।
हजार कामों की व्यस्तता के बावजूद आम माता-पिता की तरह वे भी अपने बच्चों को अच्छा इंसान बनाने के लक्ष्य के साथ चुपचाप अपनी जिम्मेदारी निभाते रहते हैं। सिर्फ जिम्मेदारी निभाना ही नहीं, वे इस काम में सफल भी होते हैं। जैसे सैफ अली खान। अभिनेता जिस तरह अपने बच्चों की परवरिश कर रहे हैं, उसे देखकर उनकी मां शर्मिला टैगोर भी अभिभूत हैं। बेटे सैफ के बारे में वह कहती हैं कि एक अभिभावक के रूप में वह शानदार हैं!
बेटी सोहा अली खान के ‘ऑल अबाउट हर’ शीर्षक पॉडकास्ट में शर्मिला गई थीं। साथ में उनकी नातिन सारा अली खान भी थी। वहां शर्मिला ने बताया कि समय के साथ बच्चों की परवरिश का तरीका भी काफी बदल गया है। सैफ और सोहा को बड़ा करते समय वह आमतौर पर परिवार के बुजुर्गों से सलाह लेती थीं। लेकिन आजकल के माता-पिता इस बारे में दोस्तों से बात करते हैं और किताबें भी पढ़ते हैं। सैफ और सोहा जिस तरह अब यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उसे देखकर वह खुद भी सीखती हैं, ऐसा शर्मिला ने कहा।
वरिष्ठ अभिनेत्री ने बताया कि सैफ पेशेवर व्यस्तता के बीच भी बच्चों के प्रति जिम्मेदार रहते हैं। उन्होंने कभी कोई लापरवाही नहीं देखाई। वह कहती हैं कि सैफ एक बेहतरीन अभिभावक हैं। सारा के साथ मैंने उन्हें बहुत करीब से देखा है। रात में फिल्म के प्रीमियर में जाने के बाद भी सारा की पढ़ाई में कभी बाधा नहीं आई। घर लौटकर वह नियमित रूप से बेटी को लेकर होमवर्क करवाने बैठते थे।
शर्मिला का मानना है कि बच्चों की परवरिश में परफेक्ट होना जरूरी नहीं है। बल्कि उन्हें अपने तरीके से बढ़ने का अवसर देना चाहिए। सैफ को देखकर ही उन्हें यह एहसास हुआ। शर्मिला बताती हैं कि एक बार हम क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री सजा रहे थे। छोटा इब्राहिम (सैफ का बेटा) भी मेरे साथ था। वह सजावट की चीजें इधर-उधर फैला रहा था। आमतौर पर माता-पिता ऐसी स्थिति में बच्चों को डांटते हैं। लेकिन सैफ ने उसे डांटने के बजाय कहा कि दो, मुझे दो। देखो, कैसे करना है।
शर्मिला ने बताया कि छोटे तैमूर और जहांगीर के साथ भी सैफ उतने ही स्नेही और जीवंत रहते हैं। पिछले साल सैफ पर हुए हमले के बाद भी वह बच्चों के साथ पहले की तरह ही उत्साह से रहे। उन्होंने किसी भी तरह से उस घटना का प्रभाव बच्चों के मन पर नहीं पड़ने दिया, ऐसा शर्मिला ने बताया।