जापानी दर्शन की एक सुंदर अवधारणा है ओबाइतोरी (Obitori)। इसे बच्चों के विकास के लिए काफी प्रभावी विचार माना जा रहा है। आखिर यह है क्या?जापानी भाषा में ‘ओबाइ’ का मतलब चेरी और बेर के फूल होते हैं और ‘तो-री’ का अर्थ है आड़ू और नाशपाती। इन चार अलग-अलग पेड़ों और फूलों के नाम से ही ओबाइतोरी शब्द बना है। हर पेड़ अलग समय पर अलग तरीके से खिलता है और हर एक की सुंदरता भी अलग होती है। इस विचार का मूल संदेश सिर्फ एक है तुलना नहीं, बल्कि अपने तरीके से बढ़ना ही सफलता है।
ओबाइतोरी क्या सिखाता है?
ओबाइतोरी हमें याद दिलाता है कि हर इंसान अलग होता है। उसकी खूबियां, क्षमता और प्रतिभा भी अलग-अलग होती हैं। किसी की तुलना दूसरे से करना, उसकी अपनी पहचान को नकारने जैसा है। जापानी समाज में इस सोच को व्यक्तिगत विकास, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत अहम माना जाता है। खासकर बच्चों के मानसिक विकास के संदर्भ में ओबाइतोरी की अवधारणा को बेहद प्रासंगिक माना जाता है।
बच्चों के विकास में ओबाइतोरी की क्या भूमिका है?
अगर बच्चे की बार-बार दूसरों से तुलना की जाए, तो वह अपना आत्मविश्वास खोने लगता है। उसे हमेशा खुद को कमजोर महसूस होता है। लेकिन जब उसे अपने तरीके से बढ़ने दिया जाता है तो वह अपनी ताकत और कमजोरियों को स्वाभाविक रूप से स्वीकार करना सीखता है। ‘तुम जैसे हो, वैसे ही ठीक हो’ यह संदेश बच्चे के मन में गहरा आत्मविश्वास पैदा करता है। वह अपनी मजबूत पक्षों को पहचान पाता है। जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
मानसिक दबाव कम करता है
पढ़ाई, खेल या रचनात्मक कामों में जरूरत से ज्यादा तुलना बच्चों में डर, हीनभावना और चिंता पैदा करती है। ओबाइतोरी बच्चों को सिखाता है कि हर कोई एक ही रफ्तार से आगे नहीं बढ़ता। इससे मानसिक दबाव काफी हद तक कम हो जाता है। रोज की दौड़-भाग से बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका मिलता है।
सीखने में रुचि बढ़ाता है
जब तुलना का डर नहीं होता तो बच्चा गलती करने से नहीं डरता। गलतियों से सीखने की मानसिकता विकसित होती है। इससे सीखना प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आनंद का अनुभव बन जाता है।
रचनात्मकता बढ़ाता है
हर बच्चे की रुचि और प्रतिभा अलग होती है। कोई चित्र बनाना पसंद करता है, कोई गणित में अच्छा होता है, कोई संगीत या खेल में। ओबाइतोरी इस विविधता को मान्यता देता है। जिससे बच्चे की रचनात्मकता और उसकी अपनी पहचान विकसित होती है।
सहानुभूति सिखाता है
अपने रास्ते का सम्मान करना यह नहीं सिखाता कि दूसरों के रास्ते का अपमान किया जाए ओबाइतोरी बच्चों को ईर्ष्या की बजाय दूसरों की सफलता पर खुश होना सिखाता है। दूसरों की सोच को महत्व देना और सबको साथ लेकर चलना सिखाता है।
दैनिक जीवन में इसे कैसे अपनाएं?
ओबाइतोरी की अहमियत समझना माता-पिता और शिक्षकों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। क्योंकि बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं उन्हें जैसे ढाला जाता है वे वैसे ही बनते हैं। इसलिए हर बात में पीछे-आगे की तुलना करने के बजाय बच्चे की प्रगति और प्रयास को महत्व दें। दूसरे क्या कर रहे हैं इस पर नहीं बल्कि आपका बच्चा क्या सीख रहा है इस पर ध्यान दें। इससे बच्चे के मानसिक विकास का रास्ता और भी आसान हो जाता है।