आज के डिजिटल युग में मोबाइल और टैबलेट बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं। स्कूल से घर तक, खेल और पढ़ाई तक, हर काम अब स्क्रीन के इर्द-गिर्द घूमने लगा है। माता-पिता अक्सर इसे बच्चों को व्यस्त रखने या उनका मनोरंजन करने का तरीका मानते हैं। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा डाल सकता है।
अकसर देखा गया है कि बच्चे कितनी शालीनता से पढ़ाई की चादर ओढ़ कर मोबाइल फोन का गलत उपयोग करते हैं। माता-पिता भी बिना सोच-विचार के उन्हें तुरंत फोन दे देते हैं। शुरुआत में यह मामूली लग सकता है लेकिन धीरे-धीरे बच्चे का ध्यान और एकाग्रता प्रभावित होने लगती है। वे पढ़ाई में रुचि खो देते हैं, खेल-कूद और सामाजिक गतिविधियों से दूर हो जाते हैं। कई बार बच्चे घर और परिवार के कामकाज से अनभिज्ञ रहते हैं क्योंकि उनका अधिकांश समय मोबाइल में ही व्यतीत होता है।
मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल केवल पढ़ाई या मनोरंजन पर असर नहीं डालता बल्कि बच्चों की भावनात्मक स्थिति पर भी प्रभाव डालता है। लंबे समय तक स्क्रीन पर रहने वाले बच्चे चिड़चिड़े और आत्मकेंद्रित हो जाते हैं। उन्हें अपने माता-पिता और मित्रों के साथ समय बिताने में भी कठिनाई होती है। कई बार बच्चे ऑनलाइन गेम्स, सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म पर गलत जानकारी का शिकार हो जाते हैं। इससे साइबरबुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी और निजी जानकारी के जोखिम बढ़ जाते हैं।
शारीरिक दृष्टि से भी मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल हानिकारक है। बच्चों की आंखों पर दबाव बढ़ता है, दृष्टि कमजोर होती है, सिरदर्द और थकान होती है। नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है क्योंकि स्क्रीन की नीली रोशनी नींद के हार्मोन मेलाटोनिन को रोकती है। इसके कारण बच्चों में नींद की कमी, ध्यान में कमी और मानसिक थकान देखी जाती है।
बच्चों को सुरक्षित और संतुलित डिजिटल अनुभव देने के लिए माता-पिता को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। सबसे पहले स्क्रीन टाइम को सीमित करना जरूरी है। छोटे बच्चों के लिए 1 घंटे से अधिक मोबाइल का उपयोग हानिकारक माना जाता है। बच्चों को पढ़ाई या खेल के बहाने मोबाइल पर समय बिताने की अनुमति न दें। साथ ही, उन्हें खेल, संगीत, पेंटिंग और परिवार के साथ समय बिताने के विकल्प दें।
मोबाइल फोन की उपयोगिता
शिक्षा और डिजिटल लर्निंग में आज मोबाइल फोन की गुणवत्ता अधिक विस्तृत हुई है। मोबाइल फोन सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह बच्चों की पढ़ाई में मदद कर सकता है। शैक्षिक ऐप्स, वीडियो और गेम्स के जरिए विषयों को सरलता से समझाया जा सकता है। मोबाइल इंटरनेट से जोड़ता है जिससे छात्र अपने प्रोजेक्ट और अध्ययन के लिए आसानी से जानकारी जुटा सकते हैं। स्कूल से संदेश, समय सारिणी या सुरक्षा सूचना मोबाइल के जरिए तेजी से बच्चों तक पहुँच सकती है।
मोबाइल फोन के जरिए बच्चे अपने परिवार और परिवार के अन्य सदस्य से तुरंत संपर्क कर सकते हैं।स्कूल से संदेश, समय सारिणी या सुरक्षा सूचना मोबाइल के जरिए तेजी से बच्चों तक पहुंच सकती है।
सावधानियां
छोटे बच्चों के लिए मोबाइल पर 1 घंटे से अधिक समय नुकसानदेह माना जाता है। माता-पिता को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए और उन्हें सुरक्षित इंटरनेट व्यवहार के बारे में समझाना चाहिए। बच्चों को अकेलापन महसूस न हो, इसके लिए उन्हें खेल, बातचीत और अन्य गतिविधियों में शामिल करें। मोबाइल का इस्तेमाल केवल शिक्षा, शोध या स्वास्थ्य निगरानी के लिए होना चाहिए, न कि केवल मनोरंजन के लिए। बच्चों को ऐसे ऐप्स और गेम्स दें जो रचनात्मक सोच और ज्ञान बढ़ाने में मदद करें
मोबाइल और डिजिटल तकनीक सही दिशा में इस्तेमाल होने पर बच्चों के लिए फायदेमंद हो सकती है। लेकिन अनियंत्रित और अधिक समय तक स्क्रीन में उलझना उनके मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास को नुकसान पहुंचा सकता है। माता-पिता और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के डिजिटल उपयोग को संतुलित रखें और उनका बचपन खुशहाल बनाएं।