बच्चों के जीवन में पहली बार स्कूल जाने का दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है। उसके पहले तक बच्चे का समय आमतौर पर माता-पिता या करीबी लोगों के साथ बीतता है। सुबह से शाम तक माता-पिता के साथ ही रहते हैं। खिलौने, कहानियां, प्यार सब कुछ परिचित होता है। लेकिन स्कूल का मतलब अचानक एक नई जगह, नए लोग। उस उम्र के और भी बच्चे वहां होते हैं। पहले दिन बच्चों का डर जाना स्वाभाविक है। साथ ही जिज्ञासा भी काम करती है। कुछ बच्चे आसानी से घुल-मिल जाते हैं, जबकि कई बच्चों को ऐसे नए माहौल के साथ तालमेल बैठाने, अपने माता-पिता और प्रियजनों से दूर रहने में कुछ समय लगता है। स्कूल के पहले दिन के लिए अपने बच्चे को पहले से कैसे तैयार करें?
स्कूल कैसा है यह पहले समझाएं
यह बदलाव आसान नहीं है इसलिए पहले से बच्चे को समझाएं कि स्कूल कोई डरने की जगह नहीं है। कहानी की किताबें या मोबाइल पर तस्वीरें दिखाएं। यह समझाएं कि स्कूल में कैसे दोस्त बनते हैं, खेल-कूद होती है, चित्र बनाए जाते हैं और नई चीजें सीखने को मिलती हैं। स्कूल के प्रति उत्साह जगाएं।
आदतें बदलें
केवल उत्साह ही पर्याप्त नहीं है। प्रियजनों से अलग रहने की आदत भी जरूरी है। इसलिए स्कूल शुरू होने से कुछ दिन पहले ही उसे कुछ समय के लिए किसी और के पास रहने की आदत डालें। पहले आधा घंटा, फिर एक घंटा। इससे वह समझ पाएगा कि माता-पिता के बिना भी वह सुरक्षित है और माता-पिता वापस आएंगे।
छोटी-छोटी चीजें स्वयं करने दें
साथ ही बच्चे को छोटी-छोटी चीजें स्वयं करने की आदत डालें। खुद से पानी पीना, टिफिन बॉक्स खोलना, हाथ धोना इन सबका अभ्यास कराएं। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ेगा।
घर पर रूटीन बनाएं
स्कूल शुरू होने से पहले ही घर पर एक नया रूटीन तैयार करें। निश्चित समय पर सोना, सुबह उठकर तैयार होना, साथ में नाश्ता करना इन सब चीजों से बच्चा मानसिक रूप से स्कूल के लिए तैयार होगा।
इन सभी आदतों को अपनाने से यह जरूरी नहीं कि बच्चे का डर पूरी तरह खत्म हो जाए। लेकिन यह डर उसे हतोत्साहित नहीं करेगा। स्कूल का मतलब केवल माता-पिता से दूर रहना नहीं है, स्कूल का मतलब नए दोस्त, नई खुशियां और नई कहानियों की शुरुआत है। याद रखें, आपकी थोड़ी समझदारी, धैर्य और प्यार ही आपके बच्चे के जीवन में इस पहले बड़े बदलाव को सुंदर और यादगार बना सकता है।