🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

ही इज नॉट माय टाइप…’, रणबीर के बारे में दीपिका ने यह बात क्यों कही थी?

शादी के बाद 2019 में एक इंटरव्यू में खुद दीपिका ने बताया कि वह शुरुआत में रणबीर को जीवनसाथी के रूप में सोच भी नहीं पाई थी।

By अंकिता दास, Posted by : राखी मल्लिक

Feb 10, 2026 17:36 IST

साथी कैसा होगा—इसे लेकर लगभग हर इंसान के मन में कुछ न कुछ धारणाएं होती हैं। पसंद-नापसंद की एक सूची भी होती है। मन के साथी का रूप-रंग या जीवनशैली कैसी होगी, इसे लेकर पहले से ही एक स्पष्ट तस्वीर बना ली जाती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर लोग साथी की तलाश शुरू करते हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण भी इससे अलग नहीं हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में रणबीर सिंह के बारे में उन्होंने कहा था कि ही इज नॉट माय टाइप। यानी, मैं जैसा साथी चाहती हूं, रणबीर वैसे नहीं हैं।

लेकिन बाद में यही रणबीर सिंह दीपिका के जीवनसाथी बने। दोनों ने शादी भी की। उनकी एक बेटी भी है। शादी के बाद 2019 में एक इंटरव्यू में खुद दीपिका ने बताया कि वह शुरू में रणबीर को जीवनसाथी के रूप में सोच भी नहीं पाई थीं। जहां उनके एजेंट रणबीर के भविष्य को लेकर आशावादी थे, वहीं दीपिका ने कहा था, “ही इज नॉट माय टाइप।” लेकिन साथी चुनने के मामले में दीपिका को इतना चयनशील क्यों होना पड़ा?

मनोवैज्ञानिक गुरलीन बरुआ के अनुसार असल में हमारी पसंद-नापसंद की धारणाएं रोजमर्रा की कुछ आदतों से बनती हैं। परिचित माहौल से बाहर न जाना चाहना भी एक कारण है। बचपन के अनुभव और पुराने मानसिक घावों से हम अपने मन में पसंद की एक सूची बना लेते हैं। इसलिए कई बार रिश्ता स्वस्थ न होने पर भी हम उसी में बने रहते हैं, क्योंकि वह हमारे लिए जाना-पहचाना होता है। उससे बाहर निकलने से हमें डर लगता है।

साथी चुनते समय अपनी पसंद और अपने मूल्यों के बीच फर्क करना सीखना चाहिए। बाहरी गुण या शारीरिक बनावट आकर्षक हो सकती है, लेकिन उससे यह नहीं समझा जा सकता कि इंसान असल में कैसा है। मनोवैज्ञानिकों की सलाह है कि सबसे पहले खुद से एक सवाल पूछा जाना चाहिए—क्या पसंद के व्यक्ति के प्रति आकर्षण में कहीं अपने मूल्यों से समझौता तो नहीं हो रहा? गुरलीन कहती हैं कि स्वस्थ रिश्ते में मानसिक सुरक्षा होती है। आपसी भरोसा, सम्मान और आदर होता है। जीवनसाथी चुनते समय क्या इन बातों को सबसे ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए?

Prev Article
परीक्षा से पहले बच्चे के मन को कैसे शांत रखें?

Articles you may like: