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परीक्षा से पहले बच्चे के मन को कैसे शांत रखें?

विशेषज्ञ कह रहे हैं कि परीक्षा जीवन-मरण का मामला नहीं है।

By आरात्रिका दे, Posted by : राखी मल्लिक

Feb 07, 2026 17:58 IST

परीक्षा का नाम आते ही घर में थोड़ा अतिरिक्त दबाव, थोड़ी चिंता और बहुत सारी अपेक्षाएं शुरू हो जाती हैं। सिर्फ बच्चे ही नहीं, माता-पिता के मन में भी उस समय तनाव रहता है। लेकिन इस दौर में सबसे जरूरी है बच्चे को शांत रखना। क्योंकि जब दिमाग शांत रहता है, तो पढ़ाई बेहतर समझ में आती है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है। इसलिए परीक्षा से पहले घर का माहौल हल्का और सामान्य रखना ही समझदारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा जीवन-मरण का विषय नहीं है। कई माता-पिता अनजाने में अंकों को लेकर इतनी बातें करते हैं कि बच्चे डरने लगते हैं। ‘90 से नीचे नहीं आना चाहिए या उससे ज़्यादा ही लाना होगा' ऐसी बातें बच्चे के मन पर दबाव बढ़ा देती हैं। इसके बजाय कहें कि तुम कोशिश करो, हम तुम्हारे साथ हैं। यह छोटा-सा वाक्य ही उन्हें बहुत हौसला देता है।

परीक्षा से पहले नियमित दिनचर्या बहुत जरूरी है। पढ़ाई, खाना और नींद अगर सब कुछ तय समय पर हो, तो शरीर और मन दोनों ठीक रहते हैं। रात भर जागकर पढ़ने से कई बार नुकसान होता है। पर्याप्त नींद न होने पर दिमाग ठीक से काम नहीं करता और चिड़चिड़ापन आ जाता है। इसलिए परीक्षा से पहले की रात अच्छी नींद बहुत जरूरी है।

खान-पान पर भी ध्यान दें। पौष्टिक भोजन जैसे फल, अंडा, सब्ज़ियां, दाल ये सब बच्चे की ऊर्जा और एकाग्रता बढ़ाते हैं। परीक्षा के समय नया या भारी भोजन देने से बचें, ताकि पेट की समस्या न हो। कभी-कभी बच्चे का पसंदीदा खाना देने से उसका मन भी खुश रहता है।

सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, छोटे-छोटे ब्रेक भी जरूरी हैं। लगातार पढ़ने से दिमाग थक जाता है। 40 से 50 मिनट पढ़ने के बाद 10 मिनट का ब्रेक लेने को कहें। इस दौरान थोड़ा टहलना, गाना सुनना या बातचीत करना अच्छा रहता है। इससे मन तरोताजा हो जाता है।

माता-पिता का व्यवहार यहां सबसे महत्वपूर्ण होता है। घर में झगड़ा, चिल्लाना या अशांति होने पर बच्चे और ज्यादा घबरा जाते हैं। कोशिश करें कि परीक्षा के समय घर का माहौल शांत रहे। यहां तक कि रिश्तेदारों से भी कह सकते हैं कि वे अंकों को लेकर ज्यादा सवाल न पूछें।

कई बच्चे परीक्षा से पहले डर जाते हैं या सोचते हैं कि वे सब कुछ भूल गए हैं। उन्हें समझाएं कि यह बिल्कुल सामान्य है। छोटी सी प्रेरणा बहुत बड़ा असर करती है। उनके पिछले अच्छे परिणाम याद दिलाएं और कहें कि तुम कर सकते हो। चाहें तो साथ बैठकर हल्का-सा रिविजन भी करवा सकते हैं, लेकिन डांट-फटकार के बिना।

परीक्षा से एक दिन पहले नया कुछ पढ़ाने की कोशिश न करें। जो पढ़ा हुआ है, बस उसी को हल्के से देख लेना काफी है। आखिरी समय के दबाव में नया अध्याय पढ़ाने से उलझन बढ़ सकती है। बेहतर है बच्चे को रिलैक्स रहने दें।

एक और जरूरी बात है—तुलना न करना। पड़ोस की लड़की कितना पढ़ रही है या दोस्त को कितने नंबर मिलते हैं ऐसी तुलना बच्चे का आत्मविश्वास कम कर देती है। हर बच्चे की क्षमता अलग होती है, इसे समझना जरूरी है।

आखिर में याद रखें, परीक्षा का समय बच्चे के लिए डर का नहीं बल्कि एक सामान्य अनुभव होना चाहिए। थोड़ी हंसी-मजाक, थोड़ी बातचीत और थोड़ा प्यार यही सब उनके मन को हल्का रखता है। अंक बाद में आते रहेंगे, लेकिन इस समय माता-पिता का सहयोग और प्यार बच्चे के दिल में जिंदगी भर रहेगा। परीक्षाएं तो हर साल आती रहेंगी, लेकिन खुशियों के साथ बड़ा होने का यह समय फिर लौटकर नहीं आएगा।

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