वॉशिंगटन/ओटावा: उइगर समुदाय के मानवाधिकारों से जुड़े एक संगठन ने कनाडा के सांसद माइकल मा के बयान पर गंभीर चिंता जताई है।
मामला क्या है?
दरअसल एक संसदीय बैठक के दौरान सांसद ने विशेषज्ञों से पूछा कि क्या उन्होंने चीन में जबरन मजदूरी को अपनी आंखों से देखा है और कहा कि वे केवल प्रत्यक्ष देखी गई चीजों पर ही विश्वास करते हैं। इसी बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
उइगर मुद्दा क्या है?
उइगर एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है, जो चीन के शिनजियांग क्षेत्र में रहता है। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि इस समुदाय के लोगों से जबरन काम कराया जाता है और उन्हें विभिन्न उद्योगों में लगाया जाता है। हालांकि चीन इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।
विवाद क्यों बढ़ा?
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस मुद्दे पर पहले से ही कई विश्वसनीय रिपोर्ट्स और जांच सामने आ चुकी हैं। ऐसे में सांसद द्वारा इन रिपोर्ट्स पर सवाल उठाना या उन्हें न मानना, गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज करने जैसा माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या है?
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ भी इस मुद्दे पर चिंता जता चुके हैं, जबकि कई देशों ने इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया है। कनाडा समेत कुछ देशों ने तो इसे नरसंहार तक करार दिया है।
सांसद की सफाई क्या है?
बाद में सांसद ने कहा कि उनका बयान एक विशेष क्षेत्र के संदर्भ में था, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे चीन में जबरन मजदूरी के आरोपों को स्वीकार करते हैं या नहीं।
आसान भाषा में समझें
यह पूरा मामला चीन में उइगर समुदाय के साथ कथित जबरन मजदूरी और उस पर अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स की विश्वसनीयता को लेकर है। सांसद के बयान ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बहस को और तेज कर दिया है।