कोलकाताः दोनों पैर हैं दिव्यांग पर हौसले, इरादे और लक्ष्य हो तो उसके लिए मंजिल आसान दिखने लगती है। यह कहना उचित होगा कि हौसले बुलंद हो दुनिया की कोई भी बाधा आपको लक्ष्य प्राप्त करने से रोक नहीं सकती है। इस कहावत का चरितार्थ कर दिखा रहे हैं मध्य प्रदेश के भोपाल के निवासी श्रमण यादव, जो दोनों पैर से दिव्यांग हैं पर कंपा देने वाली ठंड, लंबी दूरी, यातायात की समस्या और न जाने कितनी समस्याओं की परवाह न करते हुए पश्चिम बंगाल के गंगासागर तीर्थ करने निकल पड़े हैं।
42 साल के श्रमण यादव लकड़ी से तैयार की गई चार पहिए की गाड़ी पर बैठकर गंगासागर की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि उनकी यात्रा बस या ट्रेन से ही होगी लेकिन छोटी से गाड़ी उनके लिए सहारे का काम कर रही है। श्रमण यादव के हौसले की बात करें तो उन्होंने बंगाल में कदम रखते ही रविवार की सुबह दक्षिणेश्वर काली मंदिर पहुंचे, जहां मां काली का दर्शन करने के बाद मेट्रो ट्रेन से कालीघाट पहुंचे, वहां काली की पूजा अर्चना करके गंगासागर की ओर निकल पड़े। जहां वे मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गंगासागर में डुबकी लगाएंगे।
दक्षिणेश्वर मेट्रो स्टेशन पर श्रमण से मुलाकात हुई, जहां उनसे कहा कि कड़ाके की ठंड में दिव्यांग होकर गंगासागर जाना उचित नहीं था, इस पर श्रमण ने बताया कि जिनके इरादे बुलंद हो वे हौसले से उड़ा करते हैं। यही नहीं श्रमण ने यह भी कि बंगाल में मां काली, मां दुर्गा और कपिलमुनि बाबा की कृपा हमेशा रही है। हर साल गंगासागर में विश्व व्यापी मेला लगता है लेकिन न कभी भगदड़ मचती हैं और न ही तीर्थयात्रियों को कोई नुकसान पहुंचता है। बंगाल सरकार और प्रशासन की बेहतर भूमिका रहती है। श्रमण का कहना है कि उनके इलाके के लोग अक्सर गंगासागर जाया करते थे। उनकी भी इच्छा होती गंगासागर में डुबकी लगाने की लेकिन वे ठहरे दिव्यांग। इस बार उनसे रहा नहीं गया हैसले के साथ वे भोपाल से निकल पड़े हैं और गंगासागर में डुबकी लगाकर ही वापस भोपाल लौटेंगे।