गंगासागर मेला में मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान के मौके पर लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हर साल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार और दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन का दावा है कि हर चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रशासन तैयार है। इस साल उस चुनौती से निबटने के लिए एक नयी तकनीकी की मदद ली जायेगी। पहली बार, गंगासागर में प्रयोग के तौर पर ‘वॉटर रेस्क्यू ड्रोन’ तैनात किये गये हैं, जो डूबते हुए तीर्थयात्रियों को बचाने में अहम भूमिका निभायेगा। जिला प्रशासन का दावा है कि यह ड्रोन तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षा कवच है, इसलिए इसे ””लाइफबॉय वाटर ड्रोन”” के नाम से जाना जाता है।
कैसे काम करेगा ड्रोन ?
यह खास ड्रोन पानी में डूब रहे शख्स की तुरंत पहचान सकता है और पल भर में उसके पास पहुंच सकता है। ड्रोन में इस्तेमाल अत्याधुनिक तकनीक की मदद से डूब रहे शख्स को पानी से बाहर निकालने की भी सुविधा है। अधिकारियों का मानना है कि अब तक लाइफगार्ड, बोट और डाइविंग टीम पर निर्भर रहे रेस्क्यू सिस्टम में इस लाइफबॉय वाटर ड्रोन के जुड़ने से बचाव का काम और तेज और असरदार होगा।
जिलाधिकारी का कहना है
जिला प्रशासन का दावा है कि इस नयी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट की पहल पर किया जा रहा है। दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी अरविंद कुमार मीणा ने कहा कि ड्रोन अभी ट्रायल रन स्टेज में है। एक बार पूरी तरह से चालू हो जाने पर यह गंगासागर में दौरान तीर्थयात्रियों के लिए एक बेहतरीन सुरक्षा बन जायेगा। यह मॉडर्न टेक्नोलॉजी तेज लहरों और भीड़ के बीच भी डूब रहे शख्स की जान बचा सकेगा।
डीएम संभालेंगे कंट्रोल रूम की कमान
जानकारी के अनुसार, जिले के जिलाधिकारी अरविंद कुमार मीणा स्वयं कंट्रोल रूम में मौजूद रहकर पूरी व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। बताया गया है कि इस बार लॉट नंबर आठ और नामखाना को मिलाकर कुल 21 जेटी तैयार की गयी हैं। श्रद्धालुओं की नदी आर-पार कराने के लिए 13 बार्ज, 45 पोत और 100 नावें चलायी जा रही हैं। लॉट नंबर आठ से मेला परिसर तक लगभग 1,200 सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं। हवाई निगरानी के लिए 20 ड्रोन तैनात किये गये हैं।