नई दिल्ली : भारतीय फार्मास्युटिकल मार्केट (आईपीएम) ने वर्ष 2025 का समापन लगभग ₹2,40,672 करोड़ के कुल बाजार मूल्य के साथ किया है। इस दौरान बाजार में 8.1 प्रतिशत की मूल्य वृद्धि दर्ज की गई। फार्मारैक इंडियन फार्मा इंडस्ट्री परफॉर्मेंस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में भी भारतीय दवा बाजार की वृद्धि दर 7.8 से 8.1 प्रतिशत के दायरे में बने रहने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह यथार्थवादी अनुमान मौजूदा बाजार परिस्थितियों के अनुरूप है, जहां वॉल्यूम (खपत) में उतार-चढ़ाव के बावजूद मूल्य वृद्धि मजबूत बनी हुई है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़े दर्शाते हैं कि उद्योग ने मजबूती दिखाई और सभी प्रमुख थेरेपी सेगमेंट्स में सकारात्मक मूल्य वृद्धि दर्ज की गई।
बाजार की वृद्धि मुख्य रूप से तीन प्रमुख कारणों से हुई—दवाओं की कीमतों में वृद्धि, नए उत्पादों की लॉन्चिंग और वॉल्यूम में समायोजन। नवंबर 2025 तक की अवधि में उद्योग की 5.4 प्रतिशत वृद्धि कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई जबकि 2.1 प्रतिशत योगदान नए उत्पादों से आया। हालांकि वॉल्यूम ग्रोथ केवल 0.5 प्रतिशत रही, फिर भी कुल 8 प्रतिशत की मूल्य वृद्धि अनुमान के अनुरूप रही।दिसंबर 2025 में आईपीएम ने 10.6 प्रतिशत की समेकित मूल्य वृद्धि और 2.6 प्रतिशत की यूनिट ग्रोथ दर्ज की, जो देशभर में दवाओं की खपत में निरंतर तेजी का संकेत देती है।
उद्योग के प्रदर्शन का एक प्रमुख आकर्षण एंटी-ओबेसिटी (मोटापा-रोधी) सेगमेंट का तेज विस्तार रहा है, जिसे विशेष रूप से GLP-1 एगोनिस्ट दवाओं ने आगे बढ़ाया। इस श्रेणी को 2022 में नोवो नॉर्डिस्क द्वारा Rybelsus लॉन्च किए जाने के बाद से नई गति मिली। रिपोर्ट के अनुसार यह एक मुख्यतः प्रीमियम श्रेणी है, जहां मूल्य में तेजी से वृद्धि हुई है, जबकि वॉल्यूम सीमित बना हुआ है।
2025 के अंत में नोवो नॉर्डिस्क और एली लिली जैसी वैश्विक कंपनियों द्वारा भारतीय कंपनियों सिप्ला और एमक्योर के साथ किए गए रणनीतिक समझौते आने वाले महीनों में बाजार की पहुंच और उपलब्धता बढ़ाने में सहायक होंगे।
2026 को देखते हुए रिपोर्ट में मार्च से ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं के बाजार में प्रवेश की उम्मीद जताई गई है। ऐतिहासिक रूप से ब्रांडेड जेनेरिक दवाएं मूल इनोवेटर कीमत के 20 से 35 प्रतिशत पर लॉन्च होती हैं, जिससे शुरुआती 2–3 महीनों में यूनिट खपत में 2 से 5 गुना तक वृद्धि देखी जाती है। हालांकि इससे वॉल्यूम बढ़ेगा, लेकिन कीमतों में गिरावट के कारण मूल्य वृद्धि कुछ हद तक कम हो सकती है।
रिपोर्ट में डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेट्रीज़, सन फार्मा और ज़ाइडस लाइफसाइंसेज़ को क्रॉनिक और लाइफस्टाइल आधारित थेरेपी सेगमेंट्स में उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में बताया गया है।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार आईपीएम को चार श्रेणियों में बांटा गया है—उच्च-वृद्धि वाली लाइफस्टाइल थेरेपी, वृद्ध आबादी से जुड़ी उपचार श्रेणियां, परिपक्व एक्यूट थेरेपी और ओटीसी आधारित श्रेणियां।
मूविंग एनुअल टोटल (MAT) स्तर पर ऑगमेंटिन और ग्लाइकोमेट GP शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं, जबकि दिसंबर 2025 में मासिक आधार पर माउंजारो और फोराकॉर्ट पहले और दूसरे स्थान पर पहुंच गए।
2026 के लिए कुल आईपीएम की अनुमानित वृद्धि दर 7.8 से 8.1 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है, जिसे यूरोलॉजी और एंटी-डायबिटिक क्षेत्रों में मजबूत संभावनाओं का समर्थन प्राप्त है।