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ज़मीन के बदले नौकरी घोटाला मामलाः दिल्ली की अदालत ने लालू यादव परिवार के ख़िलाफ़ आरोप तय करने के निर्देश दिए

By डॉ. अभिज्ञात

Jan 09, 2026 13:14 IST

नई दिल्ली: दिल्ली की राउज़ एवेन्यू अदालत ने शुक्रवार को ज़मीन के बदले नौकरी घोटाले के मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और अन्य आरोपियों के ख़िलाफ़ आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने आरोप तय करते हुए टिप्पणी की कि “लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार एक सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था।”

इस मामले में अदालत ने रेलवे अधिकारियों और CPO सहित 52 अभियुक्तों को बरी कर दिया है। सुनवाई के दौरान 5 अभियुक्तों की मृत्यु हो चुकी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कुल 103 लोगों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाख़िल किया था।

CBI के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धोखाधड़ी और आपराधिक साज़िश के तहत आरोप तय करने के निर्देश दिए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को तय की है, जब औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाएंगे और आरोपी आरोप स्वीकार या अस्वीकार करेंगे।

सुनवाई के दौरान तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव और मीसा भारती अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए, जबकि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और अन्य कुछ अभियुक्त वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया संदेह के आधार पर लालू यादव और उनके परिवार द्वारा एक व्यापक साज़िश दिखाई देती है। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपपत्र में नौकरी के बदले ज़मीन लिए जाने की बात स्पष्ट रूप से सामने आती है।

यह मामला उस आरोप से जुड़ा है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियाँ ज़मीन के बदले दी गईं। इससे पहले 11 सितंबर को अदालत ने आरोप तय करने पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। CBI के विशेष लोक अभियोजक डी.पी. सिंह ने दलील दी थी कि आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

वहीं, लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ वकील मनींदर सिंह ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उनका कहना था कि कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि नौकरी ज़मीन के बदले दी गई। ज़मीन की ख़रीद-बिक्री के दस्तावेज़ मौजूद हैं, जिनसे स्पष्ट होता है कि ज़मीन पैसे देकर खरीदी गई थी।

राबड़ी देवी की ओर से भी यह कहा गया कि उन्होंने ज़मीन के लिए पूरा भुगतान किया था और ज़मीन ख़रीदना कोई अपराध नहीं है। बचाव पक्ष ने ज़ोर देकर कहा कि CBI को भ्रष्टाचार साबित करना होगा क्योंकि सभी लेन-देन क़ानूनी प्रक्रिया के तहत हुए थे और किसी को कोई अनुचित लाभ नहीं दिया गया।

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