नयी दिल्लीः भारत और कोस्टा रिका के बीच पारंपरिक रूप से मैत्रीपूर्ण रहे द्विपक्षीय संबंधों में लोकतांत्रिक सहयोग को लेकर एक नई सक्रियता दिखाई दे रही है। इसी क्रम में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और इंटरनेशनल आईडिया के चेयरपर्सन ज्ञानेश कुमार की कोस्टा रिका के भारत में राजदूत नेस्टर गेब्रियल बाल्टोडानो वर्गास से मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इस मुलाकात को संस्थागत संवाद के विस्तार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में हुई यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दुनिया भर में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की विश्वसनीयता पर सवाल और चर्चा दोनों तेज हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते, चुनावी प्रबंधन और तकनीकी नवाचारों में अपनी एक अलग पहचान रखता है। वहीं कोस्टा रिका लैटिन अमेरिका में स्थिर लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच चुनावी अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान की संभावनाएं इस मुलाकात के जरिए और मजबूत होती दिख रही हैं। एएनआई रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल आईडिया जैसे वैश्विक मंच से जुड़े होने के कारण यह संवाद केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि बहुपक्षीय लोकतांत्रिक सहयोग की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
यह मुलाकात भारत–कोस्टा रिका संबंधों के उस व्यापक संदर्भ में आती है जिसमें राजनीतिक, व्यावसायिक और सांस्कृतिक जुड़ाव लगातार बढ़ा है। 1990 के दशक से दोनों देशों ने कूटनीतिक स्तर पर एक-दूसरे के साथ अपने रिश्तों को संस्थागत रूप दिया। कोस्टा रिका द्वारा 2010 में नई दिल्ली में दूतावास खोले जाने और भारत की समवर्ती मान्यता व्यवस्था ने आपसी संवाद को नियमित और सुदृढ़ बनाया है। बढ़ता व्यापार और आर्थिक संपर्क भी इन रिश्तों को व्यवहारिक आधार प्रदान करता है।
सांस्कृतिक स्तर पर भारत की छवि कोस्टा रिका में लंबे समय से सकारात्मक रही है। प्रोफेसर हिल्डा चेन अपुई द्वारा भारतीय इतिहास, दर्शन और संस्कृत को अकादमिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने से दोनों समाजों के बीच बौद्धिक सेतु बना। इसके बाद भारतीय सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियों ने जनस्तर पर भारत के प्रति रुचि और सम्मान को और गहरा किया। कुचिपुड़ी नृत्य दल की प्रस्तुति जैसी घटनाएं केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान नहीं, बल्कि सॉफ्ट पावर कूटनीति का भी उदाहरण हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा कोस्टा रिका के स्वतंत्रता दिवस पर संबंधों को और आगे ले जाने की इच्छा जताना यह दर्शाता है कि भारत मध्य अमेरिका में अपने कूटनीतिक दायरे को लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक साझेदारी के आधार पर मजबूत करना चाहता है। मुख्य चुनाव आयुक्त और कोस्टा रिका के राजदूत की यह हालिया मुलाकात इसी रणनीति का विस्तार मानी जा सकती है, जिसमें लोकतंत्र, संस्थाएं और जनसंपर्क द्विपक्षीय रिश्तों के केंद्र में हैं।