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भारतीय रेलवे ने आगामी वित्तीय वर्ष में 4,802 LHB कोच बनाने की योजना बनाई है

इस पहल का मुख्य उद्देश्य यात्री सुरक्षा बढ़ाना, यात्रा की सुविधा में वृद्धि करना और पूरे रेल नेटवर्क की परिचालन दक्षता में सुधार करना है।

By Author by: अंशुमान गोस्वामी, posted by: राखी मल्लिक

Jan 09, 2026 12:30 IST

नई दिल्ली : यात्री सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने एक बड़ी योजना बनाई है। रेल मंत्रालय ने बताया है कि वित्त वर्ष 2026–27 में कुल 4 हजार 802 लिंक हॉफ़मैन बुश (LHB) कोचों के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यात्री सुरक्षा बढ़ाना, यात्रा को अधिक आरामदायक बनाना और पूरे रेल नेटवर्क की परिचालन दक्षता में सुधार करना है।

6 जनवरी को जारी एक बयान में भारतीय रेलवे ने बताया कि जनरल और नॉन-एसी कोचों के उत्पादन में उसने रिकॉर्ड बनाया है। इन कोचों में आधुनिक और यात्री-अनुकूल सुविधाएं दी गई हैं, जिससे कम किराए में अधिक यात्रियों का परिवहन संभव हो पा रहा है। रेलवे के अनुसार इससे यात्रा अधिक आरामदायक हो रही है और कोचों की वहन क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

रेलवे ने यह भी बताया कि चालू वित्त वर्ष और आगामी वित्त वर्ष के लिए एक सतत कोच उत्पादन कार्यक्रम लागू किया गया है। इसका उद्देश्य यात्री कोचों को और अधिक आधुनिक तथा मजबूत बनाना है।

रेलवे के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 में कुल 4 हजार 838 नए LHB जनरल और नॉन-एसी कोच बनाने का लक्ष्य रखा गया था। वहीं वित्त वर्ष 2026–27 में 4 हजार 802 LHB कोचों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से 2 हजार 638 LS कोच और 2 हजार 164 LSCN कोच बनाए जाएंगे।

पिछले 11 वर्षों में भारतीय रेलवे 42 हजार 600 से अधिक LHB कोचों का निर्माण कर चुका है। वित्त वर्ष 2025–26 में (नवंबर 2025 तक) 4 हजार 224 LHB कोचों का उत्पादन किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक है।

रेलवे के अनुसार LHB कोचों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती है इनके रखरखाव की लागत कम होती है और परिचालन दक्षता अधिक होती है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इनके उत्पादन को और बढ़ाया जा रहा है। साथ ही चरणबद्ध तरीके से पुराने ICF कोचों की जगह LHB कोच लगाए जा रहे हैं। स्वदेशी तकनीक से LHB कोचों के निर्माण के जरिए भारतीय रेलवे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल को भी मजबूत कर रहा है।

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