पूर्व सांसद और अभिनेत्री दिव्या स्पंदना के एक बयान से सोशल मीडिया पर हलचल मच गई है। यह टिप्पणी उन्होंने सड़क के कुत्तों से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद की।
सड़क के कुत्तों से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेसहारा जानवरों के अनिश्चित स्वभाव और व्यवहार पर टिप्पणी की थी। इसके बाद दिव्या स्पंदना ने पुरुषों की तुलना सड़क के कुत्तों से करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की, जिस पर ज़ोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिली।
इंस्टाग्राम पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी की ओर इशारा करते हुए दिव्या ने पुरुषों के बारे में लिखा,
“एक पुरुष का मन भी पढ़ा नहीं जा सकता। पता नहीं वह कब बलात्कार कर दे तो क्या सभी पुरुषों को भी जेल में बंद कर देना चाहिए?”
इसके बाद से सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई।
उल्लेखनीय है कि बुधवार को सड़क के कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने टिप्पणी की थी-“कोई भी जानवरों का मन नहीं पढ़ सकता। कुत्ते कब काट लेंगे, यह कोई नहीं बता सकता। इलाज से बेहतर है रोकथाम।”
इस आधार पर अदालत ने कुत्तों को सड़कों से हटाकर शेल्टर में रखने का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति मेहता ने राजस्थान में हाल की कुत्तों के हमलों की घटनाओं का उल्लेख करते हुए स्थिति को गंभीर बताया।
हालाँकि, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि पहले दिए गए आदेश में सभी बेसहारा कुत्तों को सड़कों से हटाने की बात नहीं कही गई थी। आदेश केवल स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के आसपास के क्षेत्रों से सड़क के कुत्तों को हटाने तक सीमित था।