वाशिंगटनः अमेरिका–रूस के भू-राजनीतिक तनाव के कारण तीन भारतीय नाविक मुश्किल में फँस गए हैं। बुधवार को उथल-पुथल भरे उत्तरी अटलांटिक महासागर में एक नाटकीय अभियान के तहत अमेरिकी सेना ने रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर ‘मैरिनेरा’ को जब्त कर लिया। अमेरिका का आरोप है कि जहाज ने अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए वेनेज़ुएला से तेल की ढुलाई की। रूसी सरकारी समाचार माध्यम ‘आरटी’ के अनुसार, जहाज के क्रू सदस्यों में तीन भारतीय नागरिक भी शामिल थे।
‘आरटी’ के मुताबिक ‘मैरिनेरा’ पर कुल 28 क्रू सदस्य थे। इनमें सबसे अधिक 17 यूक्रेन के नागरिक थे। इसके अलावा छह जॉर्जिया के, तीन भारत के और दो रूस के नागरिक थे। रूसी सरकारी मीडिया ने यह भी बताया कि यह टैंकर प्रारंभ में कैरिबियाई देश गुयाना के ध्वज के अंतर्गत पंजीकृत था और इसे एक निजी कारोबारी ने किराए पर लिया था।
फिलहाल जहाज अमेरिका की हिरासत में है। हालांकि जब्ती के बाद इसे अमेरिका ले जाया गया है या किसी अन्य स्थान पर, यह अभी स्पष्ट नहीं है। पेंटागन का आरोप है कि वेनेज़ुएला से तेल आपूर्ति पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए यह जहाज ‘शैडो फ्लीट’ के हिस्से के रूप में काम कर रहा था। अमेरिकी युद्धपोतों और हेलिकॉप्टरों से कमांडो उतारकर वॉशिंगटन ने जहाज पर कब्जा किया।
सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि जहाज पर मौजूद तीन भारतीय नाविकों का भविष्य क्या होगा? व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने साफ कहा है कि फिलहाल नाविकों को रिहा नहीं किया जाएगा। अमेरिकी अदालत में मुकदमे के लिए उन्हें अमेरिका ले जाया जा सकता है।
अब तक इस मामले पर भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान नहीं आया है। हालांकि माना जा रहा है कि साउथ ब्लॉक स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। यह भी अनुमान है कि भारतीय नाविकों को कानूनी सहायता दिलाने के लिए भारतीय दूतावास अमेरिका और रूस, दोनों से संपर्क कर सकता है।