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प्रदर्शन के दौरान अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के किशोर को बस चालक ने कुचला, नेतन्याहू की संयम बरतने की अपील

यह प्रदर्शन उस प्रस्तावित क़ानून के ख़िलाफ़ हो रहा था, जिसके तहत अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय को इज़राइली सेना में भर्ती करने की योजना है। इस मुद्दे को लेकर सरकार और इस समुदाय के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है।

By डॉ. अभिज्ञात

Jan 07, 2026 18:46 IST

यरुशलमः यरुशलम में एक प्रदर्शन के दौरान एक बस चालक ने एक किशोर लड़के को कुचल दिया, जिसको लेकर तनाव व्याप्त है। लड़के की मौत हो गई है। मृतक की पहचान येशिवा के छात्र योसेफ आइज़ेनथाल के रूप में हुई है। यह घटना उस समय हुई, जब अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के लोग सड़क पर प्रदर्शन कर रहे थे। घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें एक सार्वजनिक बस लड़के को कुछ दूरी तक घसीटती हुई ले जाती दिख रही है और फिर उसे कुचल देती है। मौके पर मौजूद लोग चीख रहे थे और हालात बेहद अफरातफरी वाले थे।

पुलिस ने बस चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। चालक का कहना है कि बस चलाने से पहले उस पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारी सड़क जाम कर रहे थे और पुलिस पर अंडे तथा अन्य चीजें फेंक रहे थे।

इस घटना के बाद इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लोगों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि माहौल को और बिगड़ने से रोकना ज़रूरी है। इस मौत की पूरी जांच की जाएगी।

यह प्रदर्शन उस प्रस्तावित क़ानून के ख़िलाफ़ हो रहा था, जिसके तहत अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय को इज़राइली सेना में भर्ती करने की योजना है। इस मुद्दे को लेकर सरकार और इस समुदाय के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। जब 1948 में इज़राइल की स्थापना हुई थी तब कुछ चुनिंदा अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स धार्मिक छात्रों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट दी गई थी। समय के साथ धार्मिक राजनीतिक दलों के दबाव में छूट पाने वालों की संख्या बढ़ती चली गई। कई धर्मनिरपेक्ष इज़राइली इस छूट को खत्म करने के पक्ष में हैं, खासकर वे लोग जिन्होंने हाल के युद्ध में बार-बार सैन्य सेवा दी है। यह युद्ध ग़ाज़ा में फ़िलिस्तीनी उग्रवादी संगठन हमास के साथ हुआ है।

अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय का कहना है कि सैन्य सेवा से उनकी धार्मिक जीवनशैली प्रभावित होगी। इसी वजह से वे इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध कर रहे हैं और कई बार उनका विरोध हिंसक भी हो जाता है। इस पूरे विवाद ने नेतन्याहू के लिए राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर दी हैं क्योंकि उनकी सरकार इज़राइली संसद में धार्मिक दलों के समर्थन पर निर्भर है।

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