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Davos में भारत का प्रतिनिधित्व अब केवल नेताओं तक सीमित नहीं

Davos 2026: भारतीय युवाओं का नवाचार और समाधान के जरिए वैश्विक मंच पर दबदबा।

By श्वेता सिंह

Jan 19, 2026 18:47 IST

दावोसः WEF 2026 में सिर्फ बड़े CEO और मंत्री ही नहीं, बल्कि दिल्ली के 22 वर्षीय इशान प्रताप सिंह और असम की दृष्टि मेधि ने भी अपनी पहल और स्टार्टअप मॉडल के जरिए भारत की नवाचारी और सकारात्मक छवि पेश की है। दोनों युवा सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान अपने-अपने क्षेत्रों में कर रहे हैं और ग्लोबल मंच पर भारत की ताकत का संदेश दे रहे हैं।

इशान प्रताप सिंह: नागरिक सहभागिता से समाधान

इशान प्रताप सिंह Cooperation17 के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। उनका स्टार्टअप संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को नागरिक सहभागिता, शोध और स्थानीय क्रियान्वयन के जरिए आगे बढ़ाता है।

इशान का मानना है कि शहरों और गांवों की समस्याओं की जड़ में भरोसे की कमी, जानकारी का असमान वितरण और कोविड के बाद घटा सामाजिक संपर्क है। वे नागरिकों, संस्थानों और सरकारों को जोड़कर टाउन हॉल मीटिंग, स्टेकहोल्डर डायलॉग और पब्लिक मीटिंग के माध्यम से समाधान निकालते हैं।

इशान कहते हैं, “नीचले स्तर से शुरू होने वाले नागरिक-आधारित प्रयास ही सतत विकास और वैश्विक सहयोग को मजबूत कर सकते हैं। जहां लोग असहमत हैं, वहां संवाद, नई तकनीक और स्थानीय SDG क्रियान्वयन ही बदलाव ला सकते हैं।”

दृष्टि मेधि: ब्लू-कॉलर श्रमिकों का सशक्तिकरण

दृष्टि मेधि QuickGhy की सह-संस्थापक हैं। उनका उद्देश्य भारत के ब्लू-कॉलर श्रमिकों को बाजार पहुंच, कौशल विकास और रोजगार सशक्तिकरण प्रदान करना है। QuickGhy एक AI आधारित डिजिटल ट्रेड प्लेटफॉर्म है, जो व्यापारियों को उनकी कमोडिटी के लिए स्मार्ट और सटीक निर्णय लेने में मदद करता है।

दृष्टि का फोकस उत्तर-पूर्व के आदिवासी और स्थानीय समुदायों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना और उनकी आवाज वैश्विक मंच तक पहुंचाना है। उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी और डिजिटल समाधान व्यापार को सरल, पारदर्शी और समावेशी बना सकते हैं और भारत को नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित कर सकते हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि इशान और दृष्टि जैसी पहलें यह दिखाती हैं कि भारत का भविष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक नवाचार, नागरिक सहभागिता और स्थानीय सशक्तिकरण में भी है। इनके मॉडल और अनुभव दूसरे देशों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

भारत की युवा शक्ति का नया चेहरा

Davos 2026 में भारतीय युवाओं की सक्रिय उपस्थिति यह साबित करती है कि देश का प्रतिनिधित्व अब केवल बड़े नेता और उद्योगपतियों तक सीमित नहीं है। युवा उद्यमी इशान और दृष्टि यह दिखा रहे हैं कि भारत की युवा शक्ति वैश्विक मंच पर समाधान और नवाचार का नया चेहरा बन चुकी है।

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