नई दिल्लीः वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर भारतीय उद्योग ने कस्टम ड्यूटी व्यवस्था में GST जैसी सरलता और पारदर्शिता की मांग की है। उद्योग का कहना है कि मौजूदा कस्टम नियम जटिल हैं और व्यापारियों को मंजूरी के लिए कई विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। डेलॉइट इंडिया के गुलजार दीदवानिया ने कहा कि सिंगल-विंडो क्लियरेंस लागू होने से निर्यात और आयात दोनों प्रक्रियाओं में तेजी आएगी।
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम व्यापार की सुविधा के साथ-साथ विदेशी निवेशकों के भरोसे को भी बढ़ाएगा। सिंगल-विंडो मॉडल उद्योग और सरकार के बीच संपर्क का स्पष्ट मार्ग तय करेगा और कस्टम प्रक्रिया को सरल बनाएगा।
प्रमाणपत्र में समयबद्धता आवश्यक
उद्योग ने यह भी मांग की है कि AEO प्रमाणपत्र के लिए निश्चित समयसीमा तय की जाए। इस प्रमाणपत्र के तहत योग्य व्यापारी अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अतिरिक्त सुविधाएं पाते हैं, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है। EY इंडिया के सौरभ अग्रवाल के अनुसार, इससे आयात-निर्यात प्रक्रिया में तेजी आएगी।
लंबित विवादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हल करने का प्रस्ताव
देश में लगभग 1.52 लाख करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी लंबित विवादों में फंसी हुई है। उद्योग चाहता है कि इन मामलों के निपटान के लिए डिजिटल विवाद समाधान योजना लागू की जाए। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि विवादों का निपटारा ‘मामला-वार’ या ‘वर्ष-वार’ किया जाए ताकि लंबित मामले जल्दी निपटें और कर प्रणाली में भरोसे का वातावरण बने।
कस्टम स्लैब और प्रक्रियाओं में सुधार आवश्यक
वर्तमान में कस्टम ड्यूटी 8 स्लैब में बंटी हुई है। उद्योग का कहना है कि इसे 5-6 स्लैब में घटाया जाना चाहिए और रिलेटेड-पार्टी वैल्यूएशन की प्रक्रिया को तेज किया जाए। इसके अलावा पोस्ट-क्लियरेंस ऑडिट आधारित जोखिम प्रबंधन अपनाने की मांग है। KPMG के अभिषेक जैन के अनुसार, इससे न केवल विवाद कम होंगे, बल्कि व्यापार की दक्षता और आपूर्ति श्रृंखला की गति भी बढ़ेगी।
उद्योग की मांगें भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धा और निवेश आकर्षण को बढ़ाएंगी
विश्लेषकों का कहना है कि GST जैसी सरलता और सिंगल-विंडो क्लियरेंस लागू करने से भारत का व्यापार वातावरण निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनेगा। इससे न केवल घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि USD 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, कस्टम ड्यूटी में ये सुधार व्यापार को आसान बनाने, लंबित विवादों को निपटाने और निवेशकों के भरोसे को बढ़ाने के लिए जरूरी हैं। अगर बजट 2026 में ये उपाय लागू किए गए, तो भारत वैश्विक व्यापार और “Make in India” मिशन के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकता है।