नीचली अदालत से राहत मिली लेकिन हाई कोर्ट ने आत्मसमर्पण का आदेश दिया। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया लेकिन...कोई राहत नहीं मिली। बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने आत्मसमर्पण के लिए समय सीमा ही बांध दी। अब क्या करेंगे स्वर्ण व्यवसायी हत्याकांड के आरोपी BDO प्रशांत बर्मन?
अग्रिम जमानत का आवेदन करते हुए सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत बर्मन ने मामला दायर किया था। सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि शुक्रवार (23 जनवरी) तक BDO प्रशांत बर्मन को आत्मसमर्पण कर देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायाधीश विजय विश्नोई की खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया कि अब BDO प्रशांत बर्मन को आत्मसमर्पण करना ही होगा। BDO के वकील ने आत्मसमर्पण के लिए 26 जनवरी तक का समय मांगा था लेकिन उस आवेदन को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
इसके साथ ही समय सीमा बांधते हुए कहा कि BDO प्रशांत बर्मन को 23 जनवरी तक आत्मसमर्पण कर देना होगा। हालांकि यह भी कहा गया है कि आत्मसमर्पण के बाद वह जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर जांच अधिकारी BDO प्रशांत बर्मन को हिरासत में लेना चाहे तो उसके लिए भी आवेदन स्वीकार किया जाएगा।
गौरतलब है कि उत्तर बंगाल के राजगंज के BDO प्रशांत बर्मन उत्तर 24 परगना के दत्ताबाद में स्वर्ण व्यवसायी स्वपन कामिल्या के अपहरण और हत्या के मामले में प्रमुख आरोपियों में से एक हैं। उन्होंने हाई कोर्ट में अग्रीम जमानत के लिए आवेदन किया था जिसे खारिज करते हुए हाई कोर्ट के न्यायाधीश तीर्थंकर घोष ने उन्हें 72 घंटों में राज्य पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रशांत बर्मन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी अब अग्रीम जमानत याचिका को खारिज कर उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।