प्राथमिक तौर पर आपत्ति जताने के बाद आखिरकार पश्चिम बंगाल के टैब्लो को अनुमति दे दी गयी है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार गणतंत्र दिवस के लिए बनाए गए टैब्लो पर प्राथमिक रूप से केंद्र सरकार ने आपत्ति जतायी थी। लेकिन अनुमति मिलने के बाद बंगाल का टैब्लो के गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाले विशेष परेड में हिस्सा लेने में कोई बाधा नहीं रही। पर कौन सी थीम पर बनाया गया है पश्चिम बंगाल का टैब्लो?
इस साल वंदे मातरम के 150 साल पूरे हुए हैं, उसके आधार पर पश्चिम बंगाल के टैब्लो को 'स्वाधीनता आंदोलन में बंगाल' की थीम पर तैयार किया गया है। दिल्ली राज्य प्रशासन सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय थीम के साथ समानता होने के बावजूद बंगाल के टैब्लो पर रक्षा मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी ने आपत्ति दर्ज करवायी थी।
लगातार 5 बैठकें होने के बाद एक्सपर्ट कमेटी ने बंगाल के टैब्लो में कई खामियां निकालते हुए अपनी आपत्ति जतायी थी। पर क्यों? क्या थी आपत्ति की वजह?
सूत्रों की मानें तो वंदे मातरम् की थीम पर टैब्लो न बनाकर क्यों 'स्वाधीनता आंदोलन में बंगाल' की थीम पर टैब्लो का निर्माण किया गया है? यह सवाल पूछने पर पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने वंदे मातरम् को ही ध्यान में रखकर टैब्लो का थीम तैयार किया है। इसके साथ ही स्वाधीनता के आंदोलन में बंगाल की भूमिका को भी इस टैब्लो के माध्यम से दर्शाया जा रहा है।
साथ ही यह भी दलील दी गयी कि भाजपा शासित राज्यों असम, ओडिशा, राजस्थान और महाराष्ट्र के टैब्लो के थीम के साथ देश की स्वतंत्रता या वंदे मातरम् के 150 साल पूरा होने का कोई संबंध नहीं है।
सूत्रों का दावा है कि विधानसभा चुनाव से पहले अगर परेड में पश्चिम बंगाल के टैब्लो को हिस्सा लेने से रोका गया तो इसका आम जनता पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। यहीं सोचकर रक्षा मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी इस साल बंगाल के टैब्लो को परेड में हिस्सा लेने की अनुमति देने के लिए बाध्य हुई है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने गणतंत्र दिवस परेड के लिए जो टैब्लो तैयार किया है, उसमें स्वाधीनता के आंदोलन में बंगाल के स्वतंत्रता सेनानियों, लेखकों, कवियों, साहित्यकारों की भूमिका, उनके बलिदान और परिश्रम आदि के बारे में दर्शाया गया है। इसी थीम के आधार पर बंगाल के टैब्लो को सजाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक इस टैब्लो पर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय रचित वंदे मातरम् कैसे स्वाधीनता संग्राम में बंगाल समेत देश भर के स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज बन गया, इस बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके अलावा कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर, काजी नजरुल इस्लाम, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, विनय-बादल-दीनेश समेत अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में और उनकी तस्वीरें दर्शायी जाएंगी।