पिछले दिनों राज्य में निपा वायरस (Nipah Virus) से संक्रमण का दो मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। एक ब्रदर-नर्स और एक सिस्टर-नर्स निपा संक्रमण के शिकार हुए थे। हालांकि दोनों में यह संक्रमण कहां से आया, इस बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है लेकिन संभावना जतायी जा रही है कि एक वृद्धा महिला से दोनों संक्रमित हुए हैं।
वृद्धा भी संभवतः निपा वायरस से ही संक्रमित थी लेकिन उनकी मौत हो जाने की वजह से इस बारे में अधिक जानकारी नहीं मिल सकी है। दोनों नर्स पर अस्पताल में उक्त वृद्धा की देखरेख की जिम्मेदारी थी। बहरहाल, निपा वायरस से संक्रमित दोनों नर्स का इलाज बारासात के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है।
वहीं दूसरी ओर राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने निपा वायरस को लेकर गाइडलाइन जारी की है जिसमें बताया गया है कि संक्रमितों के संपर्क में आने वाले कौन से लोग 'हाई रिस्क' और 'लो रिस्क' के तौर पर चिन्हित किए जाएंगे!
कैसी है दोनों नर्स की हालत?
मिली जानकारी के अनुसार निपा संक्रमित दोनों नर्स अभी भी खतरे से बाहर नहीं है लेकिन दोनों की हालत स्थितिशील बतायी जाती है। दोनों की शारीरिक स्थिति में कोई खास गिरावट नहीं आयी है। बता दें, अस्पताल सूत्रों के हवाले से बताया गया कि गुरुवार को ब्रदर-नर्स न सिर्फ बिस्तर पर उठकर बैठ पा रहे हैं बल्कि वह थोड़ा बेहतर भी महसूस कर रहे थे।
उन्हें वेंटिलेशन से भी बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि सिस्टर-नर्स अभी भी कोमा जैसी स्थिति में ही बतायी जाती है लेकिन उन्होंने भी अपनी पलकें झपकायी और उनके हाथ-पैरों में भी हरकत देखी गयी थी।
दोनों नर्स के संपर्क में आए 171 लोगों के नमूनों की जांच की जा रही है जिसमें से 165 लोगों का नमूना नेगेटिव आ चुका है जो बड़ी राहत की बात है।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग का दिशा-निर्देश
राज्य में निपा वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया है जिसमें किस कॉन्टैक्ट के लिए कितने दिनों का क्वारंटाइन, उसके इलाज की कौन सी व्यवस्था, केमो-प्रफिलैक्सिस, जांच व इलाज आदि के बारे में स्पष्ट तरीके से सब कुछ बताया गया है। इसके साथ ही अगर किसी व्यक्ति में निपा संक्रमण के लक्षण नजर आते हैं तो कौन सी दवाई और उसका कितना डोज होगा, इस बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गयी है।
किन्हें होगा हाई रिस्क?
इस दिशा-निर्देश के मुताबिक अगर कोई संभाव्य निपा संक्रमित व्यक्ति के खून, थूक, उल्टी, पेशाब अथवा सांस के करीब आता है या उसके संपर्क में आकर 12 घंटा से अधिक समय तक किसी कमरे में बंद रहता है तो संबंधित व्यक्ति निपा वायरस संक्रमण के 'हाई रिस्क' के तौर पर चिह्नित होगा। ऐसे व्यक्तियों को कम से कम 21 दिनों के क्वारंटाइन पर रखना अनिवार्य होगा।
स्वास्थ्य कर्मियों को हिदायत दी गयी है ऐसे लोगों पर प्रतिदिन निगरानी रखनी होगी। अगर किसी भी प्रकार का लक्षण जैसे बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, नसों में खिंचाव या मानसिक स्थिति में परिवर्तन दिखाई देता है तो तुरंत अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवा कर निपा वायरस की जांच की जाए।
किसे है लो रिस्क?
अगर निपा वायरस संक्रमित व्यक्ति के कपड़ों, बिस्तर के चादर इत्यादि के संपर्क में कोई व्यक्ति आता है तो उसे 'लो रिस्क' होगा। ऐसे व्यक्तियों के मामले में भी 21 दिनों तक स्वास्थ्य पर्यवेक्षण की आवश्यकता की बात इस निर्देशिका में कही गयी है। हालांकि अगर निपा संक्रमण का कोई भी लक्षण दिखाई देता है तो तुरंत उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करने की बात भी कही गयी है।
बताया जाता है कि लक्षण और आरटी-पीसीआर पॉजीटिव निपा संक्रमित मरीजों का अविलंब एंटिवायरल इलाज शुरू करने की हिदायत इस निर्देशिका में दी गयी है। कहा गया है कि इलाज के दौरान हर 5 दिनों में आरटी-पीसीआर जांच करनी होगी और यह क्रम तब तक चलता रहेगा जब तक मरीज निपा-निगेटिव न हो जाए। अगर कोई शारीरिक समस्या नहीं दिखाई देती है तो यह जांच 24 घंटे के अंतराल में 2 बार करना होगा। अगर दोनों रिपोर्ट नेगेटिव आते हैं तो मरीज को अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।