बांकुड़ा में फॉर्म 7 से भरी गाड़ी बरामद होने के बाद से ही राज्य की राजनीति में फॉर्म 7 ही छाया हुआ है। तृणमूल लगातार भाजपा पर फॉर्म 7 जमा कर मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से हटाने का आरोप लगा रही है। तृणमूल सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी फॉर्म 7 जमा कर मतदाताओं के नाम पर आपत्ति जताने वाले विरोधी पार्टी के कार्यकर्ताओं को रवींद्र संगीत सुनाने के साथ ही थोड़ा 'DJ' भी सुना देने का उपाय बचा चुके हैं।
इन सबके बीच अब चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एक वोटर कितने फॉर्म 7 जमा कर सकता है।
बता दें, फॉर्म 7 को भरकर मतदाता सूची से नाम हटाया जाता है। अब चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को पत्र लिखकर यह स्पष्ट किया है कि एक मतदाता कितनी बार फॉर्म 7 जमा कर सकता है।
क्या कहा चुनाव आयोग ने?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि एक मतदाता कितनी बार भी फॉर्म 7 जमा कर सकता है। कानूनी तौर पर फॉर्म 7 जमा करने की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। शुक्रवार को चुनाव आयोग ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि एक मतदाता अपने विधानसभा केंद्र में जितना चाहे उतना फॉर्म 7 भर और जमा कर सकता है। हालांकि इसके साथ एक शर्त की बात भी चुनाव आयोग ने कही है।
क्या है शर्त?
चुनाव आयोग ने कहा है कि एक मतदाता को फॉर्म 7 भरने के लिए कानूनी तौर पर कोई सीमा नहीं है। लेकिन कोई व्यक्ति अगर 5 लोगों के अलावा अन्य व्यक्तियों के नाम पर आपत्ति जताते हुए उसे मतदाता सूची से हटाने का आवेदन करते हुए फॉर्म 7 भरता है तो ऐसे मामलों की जांच ERO खुद करेंगे।
इसके साथ ही बताया गया है कि राजनैतिक पार्टियों के बूथ लेवल अधिकारी (BLA) खुद भी अगर विधानसभा केंद्र के मतदाता हैं तो वह भी फॉर्म 7 भर सकते हैं। अगर कोई BLA मतदाताओं द्वारा भरे गए फॉर्म 7 को जमा करने की जिम्मेदारी लेता है तो नियमानुसार SIR प्रक्रिया के दौरान एक BLA एक दिन में अधिकतम 10 फॉर्म जमा कर सकेगा।