पीरियड के दिन वैसे ही हर महिला के लिए कष्टदायक होते हैं लेकिन सर्दियों में यह परेशानी और बढ़ जाती है। कभी समय पर पीरियड नहीं आते, तो कभी ठीक से ब्लीडिंग नहीं होती। इसके अलावा पेट के निचले हिस्से में दर्द, कमर और पैरों में खिंचाव, शरीर में थकान बनी रहती है। ऊपर से बार-बार ठंडे पानी का इस्तेमाल भी करना पड़ता है। कुल मिलाकर सर्दियों में पीरियड के दिन बेहद परेशान करने वाले हो जाते हैं लेकिन क्या आप जानती हैं कि सर्दियों में पीरियड से जुड़ी समस्याएं क्यों बढ़ जाती हैं? इसके पीछे तीन मुख्य कारण होते हैं।
सर्दियों में पीरियड के दौरान ज्यादा परेशानी क्यों होती है?
रक्त संचार का कम होना
ठंड के मौसम में रक्त वाहिकाएं और धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे पेल्विक एरिया में रक्त का संचार ठीक से नहीं हो पाता। गर्भाशय की मांसपेशियों तक पर्याप्त रक्त न पहुंचने के कारण पीरियड के समय तेज दर्द और ऐंठन होती है। साल के बाकी समय की तुलना में सर्दियों में यह दर्द दोगुना महसूस हो सकता है। इस दौरान गुनगुने पानी से नहाने या गर्म सिकाई करने से राहत मिल सकती है।
विटामिन डी की कमी
सर्दियों में धूप कम निकलती है, जिससे शरीर में पर्याप्त विटामिन डी नहीं बन पाता। वैसे भी कई महिलाओं में विटामिन डी की कमी पाई जाती है। यह कमी मासिक धर्म स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। विटामिन डी की कमी से शरीर में सूजन बढ़ती है, जिससे मेंस्ट्रुअल क्रैम्प्स और अनियमित पीरियड की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा इससे मूड स्विंग्स भी ज्यादा होते हैं, जिससे पीरियड के दौरान चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है।
लाइफस्टाइल में बदलाव
सर्दियों में पार्टियां, पिकनिक और शादियों का दौर चलता रहता है, जिससे बाहर का खाना ज्यादा हो जाता है। ठंड के कारण शारीरिक गतिविधि और एक्सरसाइज भी कम हो जाती है। ये सभी बातें सीधे तौर पर मेंस्ट्रुअल हेल्थ को प्रभावित करती हैं। एक्सरसाइज न करने से रक्त संचार ठीक नहीं रहता, जिससे पीरियड अनियमित हो सकते हैं। वहीं, अनहेल्दी खानपान से शरीर में सूजन और वजन बढ़ता है, जिससे पीरियड के दौरान दिक्कतें बढ़ जाती हैं। इसके अलावा सर्दियों में पानी पीने की मात्रा भी कम हो जाती है, जिससे डिहाइड्रेशन होता है और पीरियड की समस्याएं और बढ़ जाती हैं।