मौसम में बदलाव हमारे शरीर के लिए एक चुनौती की तरह होता है। गर्मी से बरसात या बरसात से सर्दी की ओर बढ़ते समय तापमान और नमी में उतार-चढ़ाव आता है। इस दौरान वायरस, बैक्टीरिया और फंगस तेजी से फैलते हैं। नतीजतन सर्दी, खांसी, बुखार, गले में खराश और सांस से जुड़ी परेशानियां आम हो जाती हैं। ऐसे समय में अगर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो, तो बीमार पड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
वायरल संक्रमण और एलर्जी में अंतर समझना जरूरी
अक्सर लोग वायरल संक्रमण और एलर्जी में फर्क नहीं कर पाते। वायरल संक्रमण में आमतौर पर बुखार, शरीर दर्द और कमजोरी रहती है, जबकि एलर्जी में छींक आना, नाक बहना और आंखों में पानी जैसी शिकायतें होती हैं। अगर लक्षण तीन–चार दिन से ज्यादा बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है, ताकि सही इलाज समय पर मिल सके।
संतुलित आहार से इम्युनिटी मजबूत करें
मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली की नींव सही खानपान से पड़ती है। रोज के भोजन में मौसमी फल, हरी सब्ज़ियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें। विटामिन सी और जिंक से भरपूर चीजें जैसे नींबू, आंवला, अमरूद, अंकुरित अनाज शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं। पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।
हर्बल उपाय और घरेलू नुस्खे
कुछ हर्बल तत्व भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं। तुलसी, गिलोय, हल्दी और अदरक का सेवन शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। हल्दी वाला दूध, तुलसी-गिलोय का काढ़ा या शहद के साथ गुनगुना पानी लेना फायदेमंद माना जाता है। हालांकि किसी भी हर्बल सप्लीमेंट को नियमित रूप से लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।
जीवनशैली में छोटे बदलाव, बड़ा असर
बदलते मौसम में अपनी दिनचर्या में थोड़े बदलाव बहुत लाभ पहुंचा सकते हैं। शरीर को मौसम के अनुसार ढककर रखें, गीले कपड़े तुरंत बदलें और भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें। हाथों को बार-बार साबुन से धोना और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना संक्रमण के जोखिम को कम करता है। घर में ताजी हवा का प्रवाह और साफ-सफाई भी जरूरी है।
नींद, व्यायाम और तनाव प्रबंधन
पर्याप्त नींद शरीर की मरम्मत और सुरक्षा प्रणाली को सक्रिय रखती है। रोज 7–8 घंटे की नींद लेने की कोशिश करें। हल्का व्यायाम, योग और प्राणायाम रक्त संचार बेहतर बनाते हैं और फेफड़ों को मजबूत करते हैं। साथ ही, तनाव कम करना भी जरूरी है क्योंकि मानसिक दबाव सीधे तौर पर इम्युनिटी को कमजोर करता है।
हम मौसम को बदलने से रोक नहीं सकते, लेकिन अपनी सेहत की रक्षा जरूर कर सकते हैं। संतुलित आहार, सही जीवनशैली, स्वच्छता, घरेलू उपाय और समय पर डॉक्टर की सलाह से रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाई जा सकती है। अगर हम थोड़ी सावधानी बरतें, तो बदलते मौसम में भी खुद को और अपने परिवार को वायरल संक्रमणों से सुरक्षित रख सकते हैं।