वाराणसी: मणिकर्णिका घाट से जुड़ी कथित रूप से झूठी और भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर फैलाने के आरोप में वाराणसी पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज की है। रविवार को पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी कि इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
इन एफआईआर को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (धर्म, जाति, जन्मस्थान, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना), धारा 298 (किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के उद्देश्य से उपासना स्थल को नुकसान पहुंचाना), धारा 299 (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और धारा 353 (जनहित के विरुद्ध बयान) के तहत दर्ज किया गया है।
हिंदू धर्म में वाराणसी के 84 घाटों में मणिकर्णिका घाट को सबसे प्राचीन और पवित्र श्मशान स्थलों में से एक माना जाता है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों दाह संस्कार होते हैं। मान्यता है कि मणिकर्णिका की चिता की अग्नि कभी बुझती नहीं। बुधवार को सौंदर्यीकरण कार्य के तहत प्रशासन ने मणिकर्णिका घाट के एक हिस्से को तोड़ा। आरोप है कि इस दौरान मराठा साम्राज्य की राजमाता अहिल्याबाई होलकर की सदियों पुरानी प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई। पाल समाज समिति और स्थानीय मराठी समुदाय का कहना है कि घाट के सौंदर्यीकरण से पहले कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। उनका दावा है कि अहिल्याबाई की प्रतिमा के अलावा कई अन्य प्राचीन मूर्तियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
इस मुद्दे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री केवल अपना नाम-पट्ट लगाकर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को मिटाना चाहते हैं। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि पवित्र काशी के इस अपमान को जनता स्वीकार नहीं करेगी। हालांकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस झूठ फैला रही है। यह विकास कार्यों को रोकने की साजिश है। राजनीतिक विवाद के बीच जिला मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार ने कहा कि मणिकर्णिका की दीवारों पर बनी नक्काशीदार कलाकृतियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। कुछ कलाकृतियों को संस्कृति विभाग ने सुरक्षित रखा है और उन्हें बाद में पुनः स्थापित किया जाएगा।
वाराणसी के भाजपा विधायक नीलकंठ तिवारी ने कहा कि ये पत्थर 200 से 400 साल पुराने हैं और निर्माण कार्य के दौरान गिर गए। यह जानबूझकर नहीं किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि काशीखंड से जुड़े किसी मंदिर या मूर्ति को न तो तोड़ा गया है और न ही तोड़ा जाएगा। इस पूरे विवाद पर वाराणसी से सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।