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ट्रंप का भारत कार्ड! आखिर क्यों टैरिफ और ट्रेड डील के तनाव के बीच भारत की जरूरत पड़ी? भेजा न्योता

क्यों डोनाल्ड ट्रंप गाज़ा पीस बोर्ड में भारत को शामिल करना चाहते हैं?

By Moumita Bhattacharya

Jan 19, 2026 01:47 IST

भारत और अमेरिका के बीच पिछले लगभग एक साल से टैरिफ और ट्रेड डील को लेकर तनातनी चल रही है। इस बीच एक गंभीर मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत की जरूरत महसूस हो रही है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ट्रंप ने भारत को गाज़ा पीस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। पर यह है क्या? क्यों डोनाल्ड ट्रंप इसमें भारत को शामिल करना चाहते हैं?

Zee News की मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को जिस गाज़ा पीस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है, उसका उद्देश्य मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करना है। इसका काम गाज़ा में युद्ध के बाद नई सरकार और पुनर्निर्माण के कामकाज की देखभाल करना है।

दावा किया जा रहा है कि गाज़ा पीस बोर्ड की कमान खुद ट्रंप अपने हाथों में रखने वाले हैं। वहीं बोर्ड के चेयरमैन भी होंगे। इसमें एक एक्सपर्ट कमेटी और एग्जीक्यूटिव कमेटी का गठन किया जाएगा जो शासन व्यवस्था को चलाने के साथ ही सरकार के सलाहकार की अहम भूमिका निभाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि उसे भी गाज़ा पीस बोर्ड में शामिल होने का न्योता मिला है। इसके अलावा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के पास भी यह न्योता भेजा गया है। पर ट्रंप को आखिर भारत की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?

बताया जाता है कि भारत के इज़रायल और फिलिस्तीन दोनों देशों के साथ ही रिश्ते अच्छे हैं। माना जाता है कि दोनों देश ही भारत की बात को मानते हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए ही अमेरिका ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए भारत को न्योता भेजा है। मीडिया रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से बताया गया है कि इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता 60 देशों को भेजा गया है।

हालांकि कुछ देशों के अलावा अधिकांश देश सार्वजनिक तौर पर इस मामले में कोई भी बयान देने से बचते ही नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि इससे संयुक्त राष्ट्र के काम पर असर पड़ सकता है और उसकी प्रासंगिकता पर खतरा मंडरा सकता है।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ के मुख्य सदस्य

डोनाल्ड ट्रंप - चेयरमैन

मार्को रुबियो - अमेरिका के विदेशमंत्री

स्टिव व्हीटकफ - ट्रंप के विशेष दूत व आलोचक

जैरेड कुशनर - ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार व दामाद

टोनी ब्लेयर - ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री

मार्क रोयन - अमेरिकी अर्थशास्त्री और निवेशक

अजय बंगा - विश्व बैंक के अध्यक्ष

रॉबर्ट ग्रैब्रिएल - अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सहायक

किन्हें भेजा गया बोर्ड में शामिल होने का न्योता?

बोर्ड में शामिल होने का न्योता जिन्हें भेजा गया है उनमें भारत, पाकिस्तान, इटली, मिश्र, तुर्की, हंगरी, जॉर्डन और कनाडा समेत अन्य 60 देश शामिल है। अभी तक सार्वजनिक रूप से सिर्फ अमेरिका के घनिष्ठ देश हंगरी ने ही इस न्योते के बारे में अपना मुंह खोला है। सूत्रों के हवाले से बताया जाता है कि वियतनाम ने इस न्योते का सकारात्मक जवाब दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्ने ने गाज़ा के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का नैतिक रूप से समर्थन तो किया है लेकिन इसमें शामिल होने के बारे में अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है।

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